आउटलुक का यह बंपर इश्यू आखिर क्यों है खास?

Saturday, 31 October, 2015

समाचार4मीडिया ब्यूरो।। आउटलुक अंग्रेजी ने अपने प्रकाशन के बीस साल पूरे कर लिए हैं। प्रकाशन के बीस साल पूरे होने के अवसर पर आउटलुक ने अपना बंपर इश्यू निकाला है जो वास्तव में खास है। 294 पृष्ठों की इस पत्रिका में आउटलुक के इतिहास के बारे में तो बताया ही गया है साथ ही इस बात का भी जिक्र है कि कैसे पत्रिका ने अन्य अंग्रेजी की पत्रिकाओं के बीच अपना स्थाबन बनाया और एक मुकाम तक पहुंचे। big_cover_20151102 copyपत्रिकाओं के इतिहास में आउटलुक ने अपने प्रकाशन साल से ही प्रसिद्धि पाई और इसका श्रेय संस्थाापक संपादक विनोद मेहता को जाता है। पत्रिका में आउटलुक के साथ-साथ इंडिया टुडे, संडे, वीक के अलावा कई पत्रिकाओं की रोचक कहानी के बारे में लिखा गया। खास बात यह है कि पत्रिकाओं के इतिहास के बारे में जाने-माने पत्रकार वीर सांघवी, पंकज मिश्रा, सामंत सुब्रमण्यम, दिलीप बॉब के लेख है तो अरुण पुरी, मेमन मैथ्यू, अवीक सरकार, एम.जे. अकबर, शोभा डे, रघु राय की विचारोत्तेजक राय भी है। विनोद मेहता की पत्नी सुनीता मेहता ने विस्तार से विनोद जी के बारे में लिखा है कि कैसे उन्होंने पत्रकारिता में अपनी अलग मुकाम बनाई। इस बंपर इश्यू में आलोक राय, अनीता प्रताप, प्रीतीश नंदी, विमला पाटिल, मुकुल शर्मा, नयन चंदा, प्रिया रमानी, संबिल बल, सुदीप मजूमदार आदि ने मीडिया खासकर पत्रिकाओं के हर पहलू के बारे में विस्तार से लिखा है। आलोक राय ने हंस के प्रकाशन से लेकर प्रकाशन क्षेत्र की खामियों, पाठकों की दिलचस्पी के बारे में बताया है वहीं अन्य लेखकों ने भी पत्रिकाओं के सामने पाठकों के संकट से लेकर स्वरूप, बाजार आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। आउटलुक के प्रकाशन के बीस साल पूरे होने पर जिस तरह का यह अंक बाजार में आया है निश्चित तौर पर संग्रहणीय है और पाठकों को मीडिया क्षेत्र की नई जानकारियों से अवगत कराएगा।



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