आर.के.सिन्हा ने 'इंडियन एक्सप्रेस' के खिलाफ एक्शन लेने के लिए VP को भेजी अर्जी, पढ़ें यहां

आर.के.सिन्हा ने 'इंडियन एक्सप्रेस' के खिलाफ एक्शन लेने के लिए VP को भेजी अर्जी, पढ़ें यहां

Wednesday, 08 November, 2017

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

पैराडाइज पेपर्स लीक प्रकरण में नाम आने के बाद बिहार से बीजेपी के सांसद रवींद्र किशोर सिन्हा ने अब इंडियन एक्सप्रेस पर आरोप लगाया है कि वह उन्हें फिजूल में बदनाम कर रहा है। उन्होंने उपराष्ट्रपति व राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू को पत्र लिखकर अपील की है कि अखबार की रिपोर्ट से उनके विशेषाधिकार का हनन हुआ है और उनके सम्मान को ठेस पहुंची है, इसीलिए मामले को उछालने वाले इंडियन एक्सप्रेस के चार शीर्ष पद धारकों के खिलाफ विशेषाधिकार का मामला चलाया जाए।  उन्होंनें विवेक गोयनका, चेयरमैन, इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप, राजकमल झा, चीफ एडिटर, इंडियन एक्सप्रेस, रितु सरीन और श्यमालाल यादव के यादव एक्शन लेने की मांग की है।

इसमें विस्तार से बताया गया है कि वे (सिन्हा), इस मामले में कैसे बेदाग हैं? पत्र में यह भी दर्ज है कि कंपनी ने कोई भी गैर कानूनी काम नहीं किया। उसे कर वंचना या ऐसे किसी अपराध का दोषी नहीं माना जा सकता।

सिन्हा ने दावा किया है कि पैराडाइज पेपर्स खुलासे में जो भी उन पर आरोप लगे हैं वो सभी निराधार हैं। विदेश में स्थित उनकी कंपनी SIS (सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज) ने कोई भी गलत काम नहीं किया है। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी टैक्स चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशों में पैसा पार्क करने के किसी भी कृत में लिप्त नहीं है।

उन्होंने बताया कि तीस साल पहले सिक्योरिटी एंड इंटजेलिजेंस सर्विस (SIS) की स्थापना की थी जिसकी सेवा ऑस्ट्रेलिया तक फैली है। उनकी कंपनी ने जब ऑस्ट्रेलिया में अपना कारोबार बढ़ाया तो माल्टा में एसआईएस एशिया पैसेफिक होल्डिंग लिमिटेड (एसएपीएचएल) पंजीकृत कराई गई।

उन्होंने आगे बताया कि मूल कंपनी के संस्थापक अध्यक्ष और मुख्य शेयर धारक होने  के नाते वह इस नई कंपनी के एक निदेशक नियुक्त हुए। नई कंपनी एसएपीएचएलमाल्टा में वह एसआईएस की ओर से एक नामित निदेशक थे और उनका केवल एक शेयर था। माल्टा के साथ भारत सरकार ने दोहरा कर (टैक्स) निरोधक समझौता कर रखा है और इसे कर चोरी का अड्डा नहीं माना जाता। एसआईएस व इसकी सभी सहायक कंपनियों ने सेबी के सभी नियमों का पालन किया और फिर आईपीओ लाया। सेबी ने जांच-पड़ताल के बाद आईपीओ को हरी झंडी दी व किसी प्रकार की गड़बड़ी को नहीं पाया। इससे जाहिर होता है कि एसआईएस ग्रुप किसी प्रकार की गड़बड़ी, टैक्स चोरी में शामिल नहीं है। इस तरह की खबरें भविष्य में न प्रकाशित हों, इसलिए सांसद ने सभापति से मीडिया हाउस के खिलाफ विशेषाधिकार हनन कार्रवाई शुरू करने का अनुरोध किया है।

बता दें कि सिन्हा इस समय भागवत कथा यज्ञ के चलते एक सप्ताह के मौन व्रत पर हैं। उन्होंने कथित आरोपों पर लिखित जवाब दिया है।

उल्लेखनीय है कि इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, पैराडाइज पेपर्स के खुलासे में उनके समूह की दो कंपनियों के विदेशी संबंधों का पता चला है। खबर के अनुसार ब्रिटिश वर्जिन प्रायद्वीप में पंजीकृत SIS इंटरनेशनल होल्डिंग्स लिमिटेड (एसआईएचएल) नामक कंपनी में SIS एशिया पैसिफिक होल्डिंग्स लिमिटेड (एसएपीएचएल) के 39,99,999 शेयर हैं। एसएपीएचएल 2008 में माल्टा में पंजीकृत हुई है जो SIS की सहायक कंपनी है। हालांकि आरके सिन्हा का इस कंपनी में केवल एक शेयर है पर इसके निदेशकों में उनकी पत्नी रीता किशोर सिन्हा भी शामिल हैं। 2014 में राज्यसभा चुनाव के वक्त चुनाव आयोग के समक्ष दाखिल हलफनामे में आरके सिन्हा ने इस निवेश के बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी। हालांकि इस साल सेबी को उन्होंने इसकी जानकारी दी है।

इंटरनेशनल कंसोर्शियम ऑफ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) के बैनर तले 96 मीडिया संस्थानों ने मिलकर पैराडाइज पेपर्स नाम से 1.34 करोड़ वित्तीय दस्तावेज जारी किए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ये दस्तावेज बरमूडा की ऐपलबी और सिंगापुर की एशियासिटी नामक दो कंपनियों से संबंधित हैं। ये दोनों फर्म दुनिया की उन 19 कंपनियों में शामिल हैं जिनके बारे में माना जाता है कि वे अपने मुवक्किलों की कालाधन छिपाने में मदद करती हैं। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार इन दस्तावेजों में भारत के 714 नाम शामिल हैं।

यहां पढ़ें पूरा पत्र-


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