मजीठिया वेज बोर्ड: राष्ट्रपति की मंजूरी, न देने पर मीडिया हाउसेज पर 'कानूनी शिकंजा'

Friday, 30 November, 2018

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

विभिन्‍न मीडिया संस्‍थानों में कार्यरत पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए गठित वर्किंग जर्नलिस्‍ट एक्‍ट में संशोधन के प्रस्‍तावों को राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंजूरी दे दी है। यह मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों को प्रभावी ढंग से लागू किए जाने को सुनिश्चित करता है और कानून का पालन नहीं किए जाने की स्थिति में दंडनीय प्रावधान भी करता है। यानी इस कानून का पालन नहीं किए जाने पर एक साल तक की कैद की सजा हो सकती है।

दिल्ली वर्किंग जर्नलिस्ट संशोधन अधिनियम 2015 एक्ट के अन्‍य प्रावधानों में संशोधन के साथ ही यह तय किया गया है कि अब अनुबंध (Contract) पर रखे गए पत्रकारों से श्रमजीवी पत्रकार (Working Journalist) जैसा व्यवहार किया जाएगा। इसके साथ ही मीडिया संस्‍थानों द्वारा कर्मचारियों को बकाया वेतन भुगतान न किए जाने की स्थिति में उनके ऊपर अर्थदंड के साथ ही कारावास की अवधि भी बढ़ाई गई है।

दिल्ली विधानसभा ने वर्किंग जर्नलिस्‍ट अधिनियम में संशोधन के लिए दिसंबर 2015 में यह विधेयक पारित किया था, जिसे अब राष्‍ट्रपति ने मंजूरी दी है।

श्रम मंत्री गोपाल राय ने गुरुवार को कहा कि देश में मजीठिया वेतन बोर्ड को प्रभावी ढंग से लागू करने को सुनिश्चित करने के लिए कानून में संशोधन करने वाला दिल्ली पहला राज्य बन गया है।

विधिन्याय एवं विधाई कार्य विभाग द्वारा आठ मई 2018 को दिल्‍ली राजपत्र में बाकायदा इसकी अधिसूचना जारी की गई है। इस अधिसूचना की जानकारी आप सरकार ने अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल के जरिए दी है।

विधिन्याय एवं विधाई कार्य विभाग के प्रमुख सचिव अनूप कुमार मेंदीरत्‍ता की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है, 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की विधानसभा के निम्नलिखित अधिनियम में राष्ट्रपति की सहमति 17 अप्रैल को प्राप्त कर ली गई है और इसे जनसाधारण के लिए प्रकाशित किया जा रहा है।'

आइए जानते हैं कि इस एक्‍ट में अब क्‍या संशोधन किए गए हैं-

इसके तहत दिल्ली सरकार ने दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कार्यरत पत्रकार एवं अन्य के लिए समाचार पत्र कर्मचारी (सेवा की शर्ते) और विविध उपबंध अधिनियम 1955 में पुन: संशोधन किया है।

1955 के केंद्रीय अधिनियम में संख्या 45 के सेक्‍शन दो के सब सेक्‍शन (सी) के तहत शामिल 'अन्‍य नियोजित व्‍यक्ति' (other person employed) के बाद इसमें 'संविदात्मक कर्मचारियों सहित' (including contractual employees) शब्‍द भी जोड़े गए हैं।

इसके अलावा, 1955 के केंद्रीय अधिनियम की संख्या 45 के सेक्‍शन 13 में भी संशोधन किया गया है। इसके मुताबिक इस सेक्‍शन में शामिल 'प्रत्‍येक कामकाजी पत्रकार' (every working journalist) के बाद इसमें संविदात्मक कर्मचारियों सहित' (including contractual employees) शब्‍द भी जोड़े गए हैं।

संशोधित कानून के मुताबिक, अब अगर नियोक्ता ने कर्मचारियों का बकाया नहीं दिया तो धारा 17 (1) की नई उपधारा क में सक्षम अधिकारी पांच गुणा तक की राशि बतौर दंड स्‍वरूप वसूल सकता है। साथ ही अधिनियम संख्या 45 की धारा 18 में संशोधन करते हुए उपधारा (1) में आए शब्द अर्थदंड जो 200 रुपए तक बढ़ाया जा सकता है को संशोधन करते हुए उसमें कारावास जो छह माह तक बढ़ाया जा सकता है या अर्थदंड जो रुपए 5000 तक बढ़ाया जा सकता है या दोनों किया जा सकता है।

किसी कर्मचारी को देय वेतन का भुगतान न करने की स्थिति में नियोक्ता कारावास के दंड का भागी होगा, जोकि छह माह तक हो सकती है।

इसके साथ ही 1955 के केंद्रीय अधिनियम संख्या 45 की धारा 18 की उपधारा 1(क) में आए शब्द अर्थदंड सहित दंडनीय जो पांच सौ रुपए तक बढ़ाया जा सकता है, के स्थान पर संशोधन कर कारावास सहित दंड को एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, कर दिया है।

इस अधिसूचना के अनुसार, वह अर्थदंड का भी भागी होगा, जो 10 हजार रुपए तक बढ़ाया जा सकता है। किसी कर्मचारी को देय वेतन के भुगतान न करने की स्थिति में नियोक्ता कारावास सहित दंडनीय होगा। यह एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और अर्थदंड जो एक हजार रुपए प्रति कर्मचारी प्रतिदिन की दर से बढ़ाया जा सकेगा या दोनों सहित जब तक अपराध जारी रहता है।

 

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