वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई के लिए क्या है TRP...जानें यहां...

Thursday, 29 December, 2016

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप (exchange4media Group) की ओर से ‘इंडियन पीआर एंड कॉरपोरेट कम्युनिकेशन अवॉर्ड्स’ (IPRCCA) 2016 के सातवें एडिशन के विजेताओं की घोषणा हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में की गई। इसमें देश की मशहूर पब्लिक रिलेशन कंपनी ‘Adfactors PR’ के चेयरमैन राजेश चतुर्वेदी को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी दिया गया।

rajdeepकार्यक्रम में मीडिया व पब्लिक रिलेशन (पीआर) जगत की कई हस्तियों ने शिरकत की। हालांकि ‘इंडिया टुडे’ (India Today) के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई विभिन्न व्यस्तताओं के चलते इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके लेकिन एक विडियो मैसेज के जरिये उन्होंने कार्यक्रम में शामिल लोगों को संबोधित किया।

अपने संबोधन में वरिष्ठ पत्रकार राजदीव सरदेसाई ने कहा, आजकल टेजिविजन का जमाना है और टेलिविजन रेटिंग प्वाइंट (टीआरपी) के लिए चैनल कई तरह के काम करते हैं। मेरा मानना है कि टीआरपी को ट्रस्ट  और रेस्पेक्ट प्वाइंट (Trust & Respect point) के रूप में दोबारा से परिभाषित करने की जरूरत है। कई बार लोग ट्रस्ट को लोकप्रियता (Popularity) से जोड़कर देखते हैं लेकिन मेरा मानना है कि ये दोनों चीजें अलग-अलग हैं। ’

इस विडियो मैसेज में क्रेडिबिलिटी की जरूरत के बारे में बात करते हुए सरदेसाई ने पीआर एजेंसियों से कहा, ‘सबसे पहले अपने क्लाइंट का भरोसा जीतो’। उनका यह भी कहना था कि ब्रैंड बिल्डिंग रातोंरात तैयार नहीं हो जाती है बल्कि यह एक क्रमिक प्रगतिशील प्रक्रिया है जो धीरे-धीरे होती है। यदि आप सोचते हैं कि दबाव बनाकर रातोंरात ट्रस्ट अर्थात भरोसा तैयार किया जा सकता है तो मेरी नजर में यह असंभव है।’ इसके अलावा उन्होंने पीआर कंपनियों से यह भी कहा कि शॉर्टकट अपनाने वाली कंपनियां ज्यादा समय तक नहीं टिक पाएंगी।

उन्होंने कहा कि हमें सोशल मीडिया के सही इस्तेमाल के तरीके तलाशने होंगे। सिर्फ प्लेटफार्म से ही कुछ नहीं होता बल्कि आपका मैसेज सही होना चाहिए और उसमें वैल्यू होनी चाहिए इसके लिए आप सोशल मीडिया समेत कोई भी प्लेटफार्म अपना सकते हैं और धीरे-धीरे लोगों का आपके ऊपर ट्रस्ट बढ़ने लगेगा।

rajdeep1-finalरदेसाई ने कहा, ‘पत्रकारिता में कोर वैल्यू की बात करें तो उसमें तथ्य (Facts) जरूर होने चाहिए और पीआर की बात करें तो वहां भी अपने कोर मैसेज को लेकर समझौता नहीं करना चाहिए। पत्रकारिता में नैतिक मूल्यों को हमेशा सेंटर में रखना चाहिए। कोई भी स्टोरी सिर्फ ब्लैक एंड व्हाइट नहीं होती बल्कि उसमें कुछ रंग भी होते हैं। कॉम्प्लेक्स (Complex) स्‍टोरी आमतौर पर ग्रे (Grey) होती है और पत्रकारिता के लिए यह चुनौती है कि वह स्टोरी की कॉप्लेक्सिटी (complexity) को बदलती रहे। पत्रकारिता में यह जरूरी है कि तथ्य (facts) से कोई छेड़छाड़ न की जाए और लोगों के विचारों (opinions) को भी उसमें सम्मिलित किया जाए। तथ्य कभी नहीं बदलते जबकि रीडर्स के विचार अलग-अलग होते हैं और हमें दोनों चीजों को अलग-अलग रखते हुए अपने रीडर्स व व्युअर्स के विचारों का सम्मान करना चाहिए। पत्रकारिता में जब फैक्ट्स और ओपिनियन की लाइन आपस में मिल जाती है तो उससे क्रेडिबिलिटी प्रभावित होती है। दूसरी बात यह है कि हमें असली पत्रकारिता के लिए तैयार रहना चाहिए जो कई बार टीआरपी और बॉक्स ऑफिस के पीछे छिप जाती है। यह कोई लोकप्रिय होने की प्रतियोगिता (popularity contest) नहीं है, मेरे विचार से यह इनफॉर्मेशन और नॉलेज के लिए है।’

अपने विडियो मैसेज में सरदेसाई ने यह भी कहा कि पत्रकारिता को हमेशा अपने नैतिक मूल्यों को बनाए रखना चाहिए। इसमें कभी भी गलत तथ्य तोड़-मरोड़कर पेश नहीं करने चाहिए। सरदेसाई का कहना था, ‘मेरी नजर में यदि आप नॉलेज को सच्चाई से मिला देंगे तो आप अपने व्युअर्स और रीडर्स को सशक्त (empowered) बना सकेंगे। आजकल माना जाता है कि पत्रकार लगातार समझौता कर रहे हैं। हां, मैं मानता हूं कि पत्रकारों पर कई तरह का दबाव है। उन पर कॉरपोरेट, मालिकों और राजनीतिज्ञों का भी काफी दबाव रहता है लेकिन इस दबाव को कभी भी अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए और न्यूज रूम को सभी दबावों से मुक्त रखना चाहिए।’

rajdeepपब्लिक रिलेशन (PR) को एक प्रभावशाली कम्‍युनिकेशन माध्यम बताते हुए सरदेसाई ने कहा कि इस इंडस्ट्री ने काफी लंबा रास्ता तय किया है। उन्होंने बताया, ‘जब मैंने 1980 के आखिर में पत्रकारिता शुरू की थी तो पीआर प्रोफेशनल्स को ज्यादा बेहतर नहीं माना जाता था और ऐसा माना जाता था कि वे पत्रकारिता के कार्य में व्यवधान पैदा करते हैं लेकिन समय के बाद पीआर की दुनिया भी बदल गई है और अब यह कॉरपोरेट कम्युनिकेशन बन चुका है और मेरा मानना है कि पीआर का सही अर्थ प्रभावशाली कम्युनिकेशन है।’ उन्होंने माना कि किसी न किसी रूप में पीआर ने पत्रकारिता को एक नया रूप देने का काम किया है।

सरदेसाई ने कहा, ‘पत्रकार के रूप में आपका काम मैसेज देना है और आज के समय में पत्रकारिता में भी इस पीआर मशीनरी का काफी इस्तेमाल होता है। पत्रकारिता में स्टोरी के दोनों पक्षों को जानने की जरूरत है और इसके लिए कभी-कभी आपको पीआर की सहायता की जरूरत पड़ती है।’ उन्होंने पत्रकारिता और पीआर इंडस्ट्री की इस बात को लेकर काफी सराहना भी की कि दोनों ने एक-दूसरे के विपरीत चलने के बजाय एक स्वस्थ और सामंजस्‍यूपर्ण (healthy and harmonious) रिश्ता बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के अवॉर्ड समारोह पीआर प्रोफेशल्स को प्रोत्साहित करते हैं।

आखिर में सरदेसाई ने इस आयोजन के लिए ‘exchange4media’ को बधाई देते हुए विजेताओं को मुबारकबाद भी दी। उन्होंने कहा, ‘मैं आज इस कार्यक्रम को जॉइन नहीं कर सका लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि पीआर इंडस्ट्री लगातार आगे बढ़ती जाएगी और इस कार्यक्रम के विजेता पीआर इंडस्‍ट्री को एक नई दिशा देंगे और उसे नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।’

राजदीप सरदेसाई के इस पूरे विडियो को आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक देख सकते हैं।

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