रमेश जी की इस स्‍टाइल के कायल हो गए थे ऐड गुरु पीयूष पांडेय

Thursday, 13 April, 2017

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

दैनिक भास्‍कर ग्रुप के चेयरमैन रमेशचंद्र अग्रवाल के निधन पर ऐड गुरु और ऑगिल्वी एंड माथर के एग्जिक्‍यूटिव चेयरमैन एवं क्रिएटिव डायरेक्‍टर (दक्षिण एशिया) पीयूष पांडेय ने उन्‍हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।

पीयूष पांडे का कहना है कि वह (रमेश अग्रवाल) काफी दूरदर्शी थे, जिन्‍होंने फैमिली बिजनेस को इतने बड़े इंस्‍टीट्यूशन में बदल दिया और अपने पीछे एक शानदार विरासत और एक बहुत बड़ा ब्रैंड छोड़ गए हैं।

पीयूष पांडेय के शब्‍दों में, ‘रमेश जी बहुत ही प्रोफेशनल थे और कई वर्षों से डीबी कॉर्प लिमिटेड के बोर्ड में शामिल होने के कारण मैं उन्‍हें अच्‍छी तरह से जानता था। उन्‍होंने बहुत ही बेहतर ब्रैंड तैयार किया है और आज दैनिक भास्‍कर ग्रुप एक बेहतरीन ग्रुप है। कैसे उन्‍होंने इस ग्रुप का नेतृत्‍व किया और अपने बेटों व यहां काम करने वालों को मजबूत बनाया, यह वाकई काबिले तारीफ है और बोर्ड मीटिंग में इसका प्रत्‍यक्ष उदाहरण देखने को मिलता था। इसके अलावा रमेश जी एक बहुत ही शानदार व्‍यक्तित्‍व भी थे और हमेशा एडिटोरियल कंटेंट पर ध्‍यान देते थे। इसलिए वह दैनिक भास्‍कर जैसा ब्रैंड बनाने में कामयाब हुए।’

पीयूष पांडेय का कहना है, ‘रमेश अग्रवाल ने अपने बेटों को सारी शक्तियां दे रखी थीं ताकि वे एजेंसियों और दूसरे पार्टनर्स के साथ डील कर सकें। बोर्ड मीटिंग में वह सिर्फ काम पूरा होने के बारे में और स्‍ट्रेटजिक मैनेजमेंट डिसीजन के बारे में बात करते थे। आमतौर पर एजेंसी पार्टनर के साथ उनकी बातचीत नहीं होती थी। यह काम उन्‍होंने अपने बेटों अथवा भरोसेमंद लोगों के ऊपर छोड़ रखा था।’

पीयूष पांडेय ने कहा, ‘रमेश जी के साथ मेरी भी काफी यादें जुड़ी हुई हैं और मुझे उनका वह तरीका काफी पसंद आया था जब उन्‍होंने मुझे डीबी कॉर्प के बार्ड में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। दरअसल, एक दिन रमेश जी के बेटे गिरीश अग्रवाल का फोन मेरे पास आया और कहा कि उनके पिताजी मुझसे मिलना चाहते हैं। मैंने कहा कि ठीक है, वह जहां कहेंगे मैं मिलने के लिए आ जाउंगा लेकिन गिरीश अग्रवाल ने कहा कि नहीं, वह आपसे आपके ऑफिस में आकर मिलना चाहते हैं। एक दिन बाद ही रमेश अग्रवाल हाथों में गुलदस्‍ता लेकर मुझसे मिलने मेरे ऑफिस में आए और डीबी कॉर्प के बोर्ड में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। मेरे लिए यह बहुत आश्‍चर्य की बात थी कि इतना बड़ा आदमी मुझसे इस तरह आकर मिला।’

‘अभी एक महीना भी नहीं हुआ जब डीबी कॉर्प लिमिटेड की बैठक में रमेश अग्रवाल जी से मेरी मुलाकात हुई थी। तब वह बिल्‍कुल स्‍वस्‍थ थे। उनके निधन की खबर सुनकर मुझे बहुत धक्‍का लगा है। मेरे लिए यह विश्‍वास करना बहुत मुश्किल हो रहा है कि वह अब हमारे बीच नहीं रहे हैं। रमेश जी का जाना पूरी पब्लिशिंग इंडस्‍ट्री के लिए काफी बड़ी क्षति है और यह डीबी कॉर्प लिमिटेड के लिए भी काफी बुरा है।’

पीयूष के शब्‍दों में, ‘बोर्ड की मीटिंग हमेशा मुंबई में होती थी और बोर्ड में एक से बढ़कर एक प्रोफेशल शामिल होते थे। इनमें से कई लोग मेरे क्‍लाइंट भी होते थे, उन सबने निर्णय लेने की प्रक्रिया में काफी योगदान दिया है।’

पीयूष पांडे के अनुसार, ‘हर बोर्ड मीटिंग में मैंने यह महसूस किया कि रमेश अग्रवाल दूरदृष्‍टा  थे और उन्‍होंने काफी महत्‍वपूर्ण योगदान दिया लेकिन उन्‍होंने हमेशा बोर्ड मेंबर्स को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया। यह रमेश अग्रवाल जी की प्रतिभा ही थी जिन्‍होंने इंडस्‍ट्री के प्रोफेशनल लोगों को साथ मिलाकर काम किया और उनकी विशेषज्ञता की सहायता से फैमिली बिजनेस को एक इंस्‍टीट्यूशन में परिवर्तित कर दिया। मुझे पूरा विश्‍वास है कि उनका परिवार इस विरासत को संभालकर रखेगा और दैनिक भास्‍कर को और बड़ा ब्रैंड बनाएगा।’

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