इस वजह से प्रिंट मीडिया के विज्ञापनों में आई बड़ी कमी

इस वजह से प्रिंट मीडिया के विज्ञापनों में आई बड़ी कमी

Monday, 12 June, 2017

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।


रियल एस्‍टेट रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट एक्‍ट (रेरा) के लागू होने के साथ ही इसका असर दिखाई देने लगा है। मई 2017 में लागू होने के बाद इस एक्‍ट ने रियल एस्‍टेट सेक्‍टर को अपने मार्केटिंग शेयर में बडे पैमाने पर कटौती करने को मजबूर कर दिया है। बताया जाता है कि रेरा को लागू करने के कारण डेवलपर्स द्वारा प्रिंट को दिए जाने वाले ऐडवर्टाइजमेंट में 40 प्रतिशत तक की गिरावट आई है।


उल्‍लेखनीय है कि रेरा के तहत रियल एस्‍टेट सेक्‍टर के लिए नई गाइडलाइंस जारी की गई हैं ताकि संपत्तियों की खरीद-फरोख्‍त में हो रहे फर्जीवाड़े को रोका जा सके और इसमें पारदर्शिता लाई जा सके। इसमें ऐडवर्टाइजमेंट के लिए भी एक नई पॉलिसी लागू की गई है।


रेरा की नई गाइडलाइंस के अनुसार, इस एक्‍ट के त‍हत गठित किए गए प्राधिकरण में रजिस्‍ट्रेशन कराए बिना कोई भी प्रमोटर अपने रियल एस्‍टेट प्रोजेक्‍ट का न तो विज्ञापन कर सकता है, न ही उसे बुक कर सकता है। इसके अलावा उसे बेचने के साथ ही लोगों को खरीदारी के लिए आमंत्रित भी नहीं किया जा सकता है। कहने का मतलब है कि किसी भी प्रमोटर को इन सब बातों के लिए अपने प्रोजेक्‍ट को इस प्राधिकरण में रजिस्‍टर्ड कराना होगा। इसके तहत किए जाने वाले प्रत्‍येक ऐडवर्टाइजमेंट में रेरा रजिस्‍ट्रेशन नंबर लेना होगा।

रेरा की नई गाइडलाइंस को लेकर इंडस्‍ट्री के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक इससे विभिन्‍न प्‍लेटफार्म पर किए जाने वाले खर्च में काफी कटौती आई है।


प्रिंट ऐडवर्टाइजिंग पर रेरा के प्रभाव के बारे में बेनेट कोलमैन एंड कंपनी’ (BCCL) के पूर्ण स्‍वामित्‍व वाली सहायक कंपनी वर्ल्‍डवाइड मीडियाके हेड (बिजनेस स्‍ट्रेटजी और स्‍पेशल प्रोजेक्‍ट्स) सुनील वुथू का कहना है, ‘इस समय जितने भी रियल एस्‍टेट प्‍लेयर्स हैं, वह रेरा को ध्‍यान में रखते हुए अपने प्रोजेक्‍ट के रजिस्‍ट्रेशन में लगे हुए हैं और उनका पूरा ध्‍यान कंपनी को नए नियमों के तहत शिफ्ट करने पर है।


सामान्‍यत: जब कोई बडा एक्‍ट पास किया जाता है तो तत्‍काल संबंधित इंडस्‍ट्री और उसके शेयरधारकों को नए नियमों का पालन करना होता है और यह एडजस्‍टमेंट रातोंरात नहीं होता है। ऐसे में रियल एस्‍टेट प्रोजेक्‍टों द्वारा दिए जाने वाले विज्ञापनों को लेकर हम भी उसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। रियल एस्‍टेट ऐडवर्टाइजिंग पर दिखाई दे रहा यह प्रभाव थोडे समय के लिए ही है लेकिन मेरा मानना है कि आने वाले समय में नए नियमों से और पारदर्शिता आएगी और इससे घर खरीदने वालों, ब्रोकर्स, पब्लिशर्स और इंडस्‍ट्री के अन्‍य शेयरधारकों को फायदा मिलेगा।’  ‘वर्ल्‍डवाइड मीडियाकंपनी 11 मैगजीन का प्रकाशन करती है, जिनमें फेमिना’, ‘फिल्‍मफेयर’, ‘लोनली प्‍लैनेट’, ‘टॉप गियर’, ‘गुड होम्‍सआदि शामिल हैं।


     

लॉडस्टार यूएम इंडियाकी सीईओ नंदिनी डायस के अनुसार, ‘रियल एस्‍टेट द्वारा दिए जाने वाले विज्ञापनों में आई हुई कंपनी जल्‍द दूर हो जाएगी, बस एक बार यह गुबार शांत हो जाने दें। मेरा मानना है कि सरकार जब भी किसी इंडस्‍ट्री के लिए नए नियम लागू करती है तो उन्‍हें सही से लागू होने और एडजस्‍ट होने में थोडा समय लगता है। रेरा के तहत लागू किए गए नियमों के तहत एडजस्‍ट होने में रियल एस्‍टेट इंडस्‍ट्री को भी समय लगेगा। हालांकि वे जानते हैं कि बिना ऐडवर्टाइजमेंट के नए कस्‍टमर को टार्गेट नहीं किया जा सकता है। इसलिए एक बार जब यह नई प्रक्रिया पूरी हो जाएगी तो मुझे भरोसा है कि स्थिति फिर पहले जैसी सामान्‍य हो जाएगी।’  

 

एचडीएफसी रेडके सीईओ सोहेल आईएस का कहना है, ‘रेरा के मद्देनजर डेवलपर्स अपनी मार्केटिंग एक्टिविटीज को लेकर और ज्‍यादा सतर्क और विवेकी हो गए हैं। एक बार यह शुरुआती स्थिति खत्‍म हो जाए तो रियल एस्‍टेट में ऐडवर्टाइजिंग फिर से लौट आएगा। रेरा का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए अधिकांश डेवलपर्स ने स्‍पेशल नियम सेट किए हैं। इस सोच को अन्‍य मार्केटिंग एक्टिविटीज को कवर करने के लिए भी विस्‍तारित करना चाहिए। आपके द्वारा प्रस्‍तुत प्रोजेक्‍ट का लिखित और डिजिटल में रिप्रजेंटेशन होना चाहिए। डेवलपर्स को रेरा-संवेदीकृत भागीदारों और एजेंसियों के साथ काम करना चाहिए। आंतरिक टीमों को प्रशिक्षण देने के अलावाडेवलपर्स को प्रोजेक्ट प्रमोशन में रुकावट कम करने के लिए साझेदारों के साथ मिलकर काम करना चाहिए।


रेरा के तहत लगाए गए पहले जुर्माने की गाज मुंबई की एक रियल एस्‍टेट कंसल्‍टेंट फर्म पर गिर चुकी है। निर्माणाधीन प्रोजेक्‍ट के बारे में भ्रामक विज्ञापन देने के आरोप में इस फर्म पर 1.2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस घटना ने रियल एस्‍टेट सेक्‍टर पर प्रभाव डाला है और वह मार्केट स्‍ट्रेटजी को दोबारा शुरू करने से पहले कोई रिस्‍क नहीं लेना चाहते हैं।

 

मुंबई के जाने-माने रियल एस्‍टेट ग्रुप प्रजापति बिल्‍डर्सके मैनेजिंग डायरेक्‍टर राजेश प्रजापति के अनुसार, ‘डेवलपर्स के बीच अभी इस एक्‍ट को लेकर डर है और तीन महीने की अवधि का इंतजार कर रहे हैं ताकि एक्‍ट के बारे में और ज्‍यादा स्थिति स्‍पष्‍ट हो सके। सबसे बडी बात कि जिस हिसाब से जुर्माने का प्रावधान किया गया है, उसमें बिल्‍डर कम्‍युनिटी कोई भी रिस्‍क उठाना नहीं चाहेगी। बिल्‍डर कम्‍युनिटी पहले ही कम मार्जिन पर काम कर रही है। रेरा के कारण हमारे पास पहले ही नए ग्राहक कम हैं और नए प्रोजेक्‍ट को लेकर होने वाली पूछताछ में भी कमी आई है।’  

 

वहीं, ‘नोब्रोकर डॉट कॉमके डायरेक्‍टर (मार्केटिंग) शिव प्रसाद का भी मानना है कि रेरा लागू होने के बाद ऐडवर्टाइजिंग में कमी देखने को मिली है। उनका कहना है, ‘रेरा के प्रभावी रूप से क्रियान्‍वयन के लिए सरकार द्वारा उपलब्‍ध कराई गर्इ व्‍यवस्‍था के अनुसार, डेवलपर और बिल्‍डर द्वारा ऐडवर्टाइजिंग और मार्केटिंग पर होने वाले खर्च में निश्चित रूप से कमी आएगी। एक बार यह शुरुआती समय बीत जाने के बाद इसमें सुधार होगा।


एक ओर रियल एस्‍टेट प्‍लेयर्स फिलहाल देखो और इंतजार करोकी नीति अपना रहे हैं, ‘Housing.com’, ‘PropTiger.com’ और ‘Makaan.com’ के चीफ स्‍ट्रेटजी ऑफिसर सुनील मिश्रा का मानना है कि रियल एस्‍टेट सेक्‍टर में मार्केटिंग गतिविधियों में कमी का मामला अस्‍थाई है और अल्‍द ही इसमें उछाल आएगा।


सुनील का कहना है, ‘फिलहाल एक मई से रेरा सिर्फ महाराष्‍ट्र में लागू है। महाराष्‍ट्र में रेरा के तहत अपने प्रोजेक्‍ट्स को रजिर्स्‍ड कराने के लिए डेवलपर्स को 90 दिन का समय दिया गया है। हालांकि अभी ऐडवर्टाइजिंग में खास कमी नहीं आई है। रजिस्‍ट्रेशन पेपर्स जमा करने के लिए और अपने प्रोजेक्‍ट का और विस्‍तृत प्‍लान बनाने के लिए डेवलपर्स को ज्‍यादा समय लग रहा है। इस वजह से ही मार्केटिंग गतिविधियों में अस्‍थायी गिरावट दर्ज की गई है। आने वाले समय में जब रेरा सभी राज्‍यों में लागू हो जाएगा और सभी डेवलपर्स अपने प्रोजेक्‍ट्स को रजिस्‍टर्ड करा देंगे, ऐडवर्टाइजिंग और मार्केटिंग अपनी पूरी ताकत से फिर वापस लौटेगी।


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