वरिष्ठ पत्रकार मृणाल पांडे ने तो सीधे प्रधानमंत्री को अपना शत्रु बना लिया, बोले निर्मलेंदु...

Monday, 18 September, 2017

निर्मलेंदु

कार्यकारी संपादक

दैनिक राषट्रीय उजाला

 

कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बर्थडे पर सोशल मीडिया पर उन्हें खूब बधाईयां व शुभकामनाएं मिलीं। लेकिन एक ट्वीट ऐसा भी आया, जिसने पत्रकारिता जगत को भी भौचक्के में डाल दिया। यह ट्वीट दरअसल, किसी और ने नहीं, बल्कि जानी मानी पत्रकार मृणाल पांडे का था। एक ट्वीट ने बवाल मचा दिया।

 

उन्होंने ट्विटर पर एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा जुमला जयंती पर आनंदित, पुलकित, रोमांचित वैशाखनंदन। इस ट्विट के साथ उन्होंने जो तस्वीर (गधे की) पोस्ट की, उसे लेकर काफी बवाल मचा हुआ है। पत्रकार बिरादरी के साथी इस ट्विट से काफी नाराज दिखे। उनकी नाराजगी सही है, क्योंकि जो तस्वीर उन्होंने पोस्ट की, वह यदि उन्होंने पोस्ट नहीं की होती, तो शायद बवाल नहीं मचता। तमाम पत्रकारों ने इस कृत्य की खूब और खूब निंदा की है। दरअसल, यह निंदा जायज है, क्योंकि फेसबुक और ट्विटर का इस्तेमाल गलत तरीके से नहीं हो, इस बात की जिम्मेदारी हम सब पर है। यदि एक लीजेंड पत्रकार इस तरह से तस्वीर पोस्ट करके देश के पीएम को व्यंग्य शैली में गाली देंगी, तो आम आदमी से आप किस तरह अलग हैं।

 

दरअसल, पत्रकार पहले एक शिक्षक है और उसके बाद एक पत्रकार। हम कुछ लिख लेते हैं और पढ़ लेते हैं, इससे पत्रकारिता साबित नहीं होती। हम समाज को एक तरह से सिखाने का काम करते हैं। हम कितने मार्जित हैं, कितने व्यवहारकुशल हैं, कितने समझदार हैं, कब कौन सी बात को कहनी है और कब नहीं कहनी है, कितना कहना है और कितना नहीं कहना है, यह हमें जानना होगा, समझना होगा, बूझना होगा, उस पर अमल करना होगा। तभी हम पत्रकारिता की मर्यादा को परिभाषित कर पाएंगे। पत्रकारिता के मूल अर्थ को समझ पाएंगे।

 

शायद मृणाल जी को यह पता नहीं कि प्रशंसा वह हथियार है, जिससे शत्रु को भी मित्र बनाया जा सकता है। लेकिन इन्होंने तो सीधे प्रधानमंत्री को अपना शत्रु बना लिया। विवेकानंद ने कहा था कि लगातार पवित्र विचार करते रहें। बुरे संस्कारों को दबाने के लिए एक मात्र समाधान यही है। शायद मृणाल जी ने विवेकानंद को नहीं पढ़ा, यदि पढ़ी होतीं, तो शायद इस तरह की गैरजिम्मेदाराना बातें नहीं करतीं। उन्हें शायद पता है कि फूलों की सुगंध केवल वायु की दिशा में फैलती है, लेकिन एक व्यक्ति की अच्छाई हर दिशा में फैलती है। उस व्यक्ति की अच्छाई चारों दिशाओं को खूबसूरत बना देती है।

 

मृणाल जी का मैं बहुत आदर करता हूं, और करता भी रहूंगा, लेकिन इस कृत्य के कारण मुझे दुख हुआ। मुझे लगा कि हम किस दुनिया में रह रहे हैं। दरअसल, जिस तरह सोने का परीक्षण उसे घिसकर, काटकर, तपा कर और पीट कर की जाती है, ठीक उसी तरह मनुष्य का परीक्षण भी उसके त्याग, आचरण, गुण और उसके व्यवहार से की जाती है। यदि हम इस बात को गांठ बांध लें, तो जिंदगी में खुशी ही खुशी होती है, अन्यथा ...

 

कुएं में उतरने वाली बाल्टी यदि झुकती है, तो भर कर ही वह बाहर आती है। जीवन का भी यही गणित है, जो झुकता है वही प्राप्त करता है। सम्मान देंगे, तो सम्मान मिलेगा, यह ट्रकों में लिखा होता है। गलती इनसान से ही होती है, लेकिन गलती करने के बाद महसूस करना ही जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई है। दादागीरी या दीदीगीरी तो हम मरने के बाद नहीं कर पाएंगे, क्योंकि हम कंधों पर होंगे, हमारा कोई वजूद नहीं होगा। कोई दो लाइन लिखनेवाला नहीं होगा, यदि हमने दूसरों का सम्मान नहीं किया। दूसरों को सम्मान करते हुए जाएंगे, तो चाहे दो हजार किलोमीटर दूर भी बैठे हों, लोग सम्मान से खड़े हो कर बात करेंगे, कहेंगे, बहुत अच्छी लिखती थीं, उनके विचार बहुत अच्छे थे, दूसरों को सम्मान करती थीं, और यदि दूसरों को सम्मान नहीं करेंगे, तो ट्रोल होते रहेंगे। दरअसल, हमारी नैतिक प्रकृति जितनी उन्नत होती है, उतना ही उच्च हमारा प्रत्यक्ष अनुभव होता है, और उतनी ही हमारी इच्छा शक्ति अधिक बलवती होती है।

 



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