सोनिया सिंह बोलीं, हो सकता है कि आपको NDTV पसंद न हो पर आप उसे देखें क्योंकि....

सोनिया सिंह बोलीं, हो सकता है कि आपको NDTV पसंद न हो पर आप उसे देखें क्योंकि....

Thursday, 05 April, 2018

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

पिछले दिनों हुए ‘एक्‍सचेंज4मीडिया न्‍यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’ (ENBA) समारोह में हाल के वर्षों में न्‍यूज में आए बदलाव को लेकर पैनल डिस्‍कशन का आयोजन किया गया। 'HOOQ Digital India Pvt. Ltd.' के एमडी सलिल कपूर के नेतृत्‍व में हुए इस पैनल डिस्‍कशन में एनडीटीवी समूह की एडिटोरियल डायरेक्टर सोनिया सिंह का कहना था कि इन दिनों मीडिया और न्‍यूज में काफी बदलाव आया है। सोनिया सिंह का कहना था, 'मुझे यह देखकर खुशी होती है कि अब जर्नलिज्‍म मोबाइल फोन से लेकर टीवी और कंप्‍यूटर स्‍क्रीन तक पर हो रहा है। यह हम सभी पत्रकारों के लिए अच्‍छी बात है। क्‍योंकि इस कारण न्‍यूज और ज्‍यादा लोकतांत्रिक हो रही है क्‍योंकि इस तरह से यह विभिन्‍न भाषाओं में बताई जा रही है और ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों तक इसकी पहुंच हो रही है, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है।'

मुझे लगता है कि आज के समय में जर्नलिज्‍म इतना महत्‍वपूर्ण इसलिए है क्‍योंकि सोशल मीडिया के आने से इसका और विस्‍तार हो गया है। पहले खबरें जुटाने के लिए सिर्फ चुनिंदा सोर्स हुआ करते थे लेकिन सोशल मीडिया आने के बाद से न्‍यूज जुटाने के सोर्स में इजाफा हुआ है। लेकिन रिपोर्टिंग, तथ्‍यों की जांच करना और क्रेडिबिलिटी बनाए रखना सबसे बड़ी जिम्‍मेदारी है। इसलिए यह काफी अच्‍छा समय है कि हमें इस तरह का अवसर मिला है।

उन्‍होंने कहा कि आज के समय में मीडिया के लिए चिंता की बात ये है कि पत्रकार एक तरह का ईको चैंबर तैयार कर देते हैं, जिससे आम लोगों को सही तथ्‍यों के बारे में पता ही नहीं चलता है। उन्‍होंने कहा कि इस स्थिति को दूर होना चाहिए। एक पत्रकार के अपने ओपिनियन तो हो सकते हैं लेकिन अपने तथ्‍य नहीं हो सकते हैं। इसलिए उसे तथ्‍यों पर जरूर ध्‍यान देना चाहिए। सोनिया सिंह का कहना था, 'हो सकता है कि आपको एनडीटीवी पसंद न हो इसके बावजूद हम चाहते हैं कि आप उसे देखें ताकि आपको तथ्‍यों के साथ तस्‍वीर के सभी पहलुओं से अवगत हो सकें। सभी के अपने ओपिनियन हो सकते हैं लेकिन मीडिया को चाहिए कि वह सही तथ्‍यों पर फोकस करे।

लोगों को गलत तथ्‍यों के आधार पर अपने ओपिनियन नहीं बनाने चाहिए। आजकल कई चैनल पहले गलत तथ्‍य दिखाते हैं और उसके बाद ओपिनियन का नंबर आता है। इन स्थितियों को लेकर हमें बहुत ही सतर्क रहना होगा। हैशटैग जर्नलिज्‍म इस प्रोफेशन के लिए बहुत ही घातक है। कुछ मामलो में तो हैशटैग बिल्‍कुल सही फिट बैठता है लेकिन गोरखपुर में जब सौ बच्‍चों की मौत हो जाती है, तो उस बड़ी घटना को कैसे इसमें फिट करेंगे।'

सोनिया सिहं ने कहा कि जब हम मार्केटिंग और सेगमेंटशन की बात करते हैं तो हम उसी हिसाब से तय कर लेते हैं कि 40 साल की उम्र के लोग यह देखते हैं और युवा वर्ग को इस तरह की खबरें पसंद आती हैं आदि। सोनिया के अनुसार, 'आखिर क्‍यों हम न्‍यूजरूम में रोजाना रात को  हिंदू-मुस्लिमों के धार्मिक लीडर्स को बैठा देते हैं जो एक-दूसरे से करारी बहस करते हुए नजर आते हैं। ऐसे में ये टीवी चैनल टीआरपी के लिए इस तरह के विवादित कार्यक्रम करते हैं, जो सही नहीं है। मैं आज के युवा पत्रकारों से यही कहना चाहती हूं कि वे रिपोर्टिंग के लिए विभिन्‍न टॉपिक जैसे- एजूकेशन, जॉब और हेल्‍थ आदि पर भी फोकस करें।

कार्यक्रम में सोनिया सिंह का कहना था, 'भारत में निजी टीवी चैनलों का सफर काफी शानदार रहा है। करीब ढाई दशक पहले इसकी शुरुआत हुई थी और हमने बेहतरीन सफर तय किया है। यह देखना बहुत ही जरूरी है कि आखिर हम अपने लिए क्‍या कर रहे हैं। हमें अपने आत्‍मसम्‍मान के लिए सभी बातों को सोचकर काम करने की जरूरत है। क्‍योंकि सरकार हमसे नहीं कह रही कि ये करो, ये न करो। चैनल सिर्फ टीआरपी की दौड़ में भाग रहे हैं। ऐसे में हमें पीछे मुड़कर देखने की जरूरत है। हमें ये देखना होगा कि हम महत्‍वपूर्ण मुद्दों पर लोगों को किस तरीके से जानकारी दे रहे हैं। मुझे लगता है कि मीडियाकर्मी टीआरपी के चक्‍कर में पड़ जाते हैं और तभी इस तरह के शो सामने आते हैं। उन्‍हें लगता है कि डिबेट कराना काफी आसान है, इस तरह की स्‍टोरी तैयार करने में ज्‍यादा खर्चा भी नहीं आता है।'

कार्यक्रम के दौरान यह पूछे जाने पर कि क्‍या आपको लगता है कि परपज ऑफ न्‍यूज से ज्‍यादा क्‍या आज के समय में बिजनेस ऑफ न्‍यूज महत्‍वपूर्ण हो गया है, सोनिया सिंह ने कहा, 'एनडीटीवी की मेरिट से स्‍पष्‍ट है कि हमारा रेटिंग सिस्‍टम में ज्‍यादा भरोसा नहीं है। हमारा मानना है कि किसी चैनल के लिए ऑनलाइन की रेटिंग अलग होगी और किसी दूसरी एजेंसी द्वारा उसकी रेटिंग अलग निकलकर आएगी। न्‍यूज चैनल काफी बड़ा सिस्‍टम होता है। हमें लगता है कि वर्तमान हालात को बदलने के लिए कुछ किया जा सकता है।'


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