Bday Spl : वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल-जयदीप कर्णिक ने ‘ताई’ को कुछ यूं दी बधाई...

Bday Spl : वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल-जयदीप कर्णिक ने ‘ताई’ को कुछ यूं दी बधाई...

Thursday, 12 April, 2018

लोकसभा स्पीकर और इंदौर सांसद सुमित्रा महाजन का 74वां जन्मदिन हैं। सुमित्रा महाजन को प्यार से ताईबुलाते हैं और वह अपने सहृदय स्वभाव के लिए जानी जाती हैं। हर दल में उनके मित्र और प्रशंसक हैं। मीरा कुमार के बाद सुमित्रा महाजन दूसरी महिला लोकसभा स्पीकर हैं। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल और जयदीप कर्णिक ने उन्हें कुछ इस तरह दी बधाई-

राजेश बादल, वरिष्ठ पत्रकार:

वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल की नजर में सुमित्रा महाजन एक ऐसी नेता हैं जिनका हर कोई सम्मान करता है, फिर चाहे वह पक्ष हो या विपक्ष। वे कहते हैं, सुमित्राजी से मेरा परिचय सबसे पहले 1980 में हुआ था, उस वक़्त उन्होंने मध्यप्रदेश की सक्रिय राजनीति में कदम रखा था। मैं उनके इंदौर नगर पालिका में उप-महापौर से लेकर लोकसभा अध्यक्ष बनने तक के सफ़र का साक्षी हूं और एक बात मैंने महसूस की है कि इतने लंबे सफ़र के बावजूद उनके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया है, जो अपने आप में एक बड़ी बात है।

आज भारतीय राजनीति को देखकर हमें निराशा होती है, लेकिन सुमित्रा महाजन जैसे नेता हमें अहसास दिलाते हैं कि उम्मीद की किरण अभी बाकी है। महाजन जब लोकसभा में बोलती हैं तो सभी दलों के सांसद सम्मान के साथ उन्हें सुनते हैं। मध्यप्रदेश की राजनीति में भी उन्हें हमेशा सम्मान मिला है। पक्ष और विपक्ष से लेकर मीडिया तक सभी उनकी काबिलियत के कायल हैं और इसलिए वे अपने असल नाम के बजाए ताई के रूप में ज्यादा लोकप्रिय हैं। सभी पक्षों के साथ जो रिश्ता उन्होंने बनाया है, उसे उन्होंने कभी टूटने नहीं दिया। इंदौर के साथ आज भी उनका जीवंत संपर्क हैं। सुमित्रा महाजन बेहद सरल, शांत और भद्र महिला हैं और भारतीय राजनीति को अभी उनकी बहुत आवश्यकता है।  

जयदीप कर्णिक, वरिष्ठ पत्रकार:

वरिष्ठ पत्रकार जयदीप कर्णिक लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन को एक ऐसी महिला के रूप में देखते हैं, जिन्होंने सफलता के शिखर पर पहुंचने के बाद भी परंपरा और मूल्यों को कायम रखा। उनके मुताबिक, सुमित्रा महाजन सहज, सरल और सौम्य व्यक्तित्व वाली नेता हैं। वे कहते हैं, 'महाजन ने लोकसभा में इंदौर का पक्ष कैसे रखा इस पर सवाल उठाये जा सकते हैं, लेकिन आज तक कोई उनके व्यक्तित्व पर उंगली नहीं उठा पाया। शायद यही वजह है कि वह लगातार आठ बार सांसद बनीं।

राजनीति में आजकल जिस तरह के चेहरे देखने को मिलते हैं, महाजन उससे बिलकुल अलग हैं।कर्णिक बताते हैं कि नन्दलाल पुरे में सुमित्रा महाजन का पुराना घर था, जिसे छोड़कर वह इंदौर के साकेत स्थित आलिशान बंगले में आ गईं। उनका घर ज़रूर बदला है, लेकिन व्यवहार नहीं बदला। उन्होंने कुछ रीतिरिवाज शुरू किए थे, जिन्हें आज भी वे पूरी शिद्दत से निभाती हैं। सुमित्रा महाजन को इंदौर में ताई यानी बड़ी बहन कहा जाता है, काफी वक़्त पहले उन्होंने भाईदूज पर एक भोज की शुरुआत की थी, जो उनके लोकसभा अध्यक्ष बनने के बाद भी आयोजित किया जाता है। इस भोज में पत्रकारों और शहर वरिष्ठ लोगों को आमंत्रित किया जाता है।

कर्णिक कहते हैं कि सुमित्रा महाजन अधिकांश लोगों को उनके नाम से जानती हैं, जब आप उनसे मिलते हैं तो वे आपके साथ-साथ आपके परिवार के बारे में भी पूछना नहीं भूलतीं। उनकी यह आदत उन्हें दूसरे नेताओं से अलग बनाती है। उन्हें अंदाज़ा होता है कि आप उनसे किस काम के लिए मिलने आये हैं, अब आप इसे दूरदर्शिता कह सकते हैं पूर्वानुमान।  


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