अभिसार शर्मा का सवाल- क्या लोगों के जेहन मे इस कदर 'सियासी गू' भर दिया गया है?

अभिसार शर्मा का सवाल- क्या लोगों के जेहन मे इस कदर 'सियासी गू' भर दिया गया है?

Friday, 11 May, 2018

अच्‍छे दिन आने वाले हैं... रेल व्‍यवस्‍था में सबकुछ बदल जाएगा... बढ़िया खाना मिलेगा और साफ-सफाई ऐसी होगी कि आप गंदगी ढूंढते रह जाएंगे। मोदी सरकार की कही ये बातें अब सिर्फ जुमले बनकर रह गईं हैं। ‘एबीपी न्यूज’ के सीनियर एंकर और वरिष्ठ टीवी पत्रकार अभिसार शर्मा ने हाल ही में अपने एक प्रोग्राम में इस बात का खुलासा किया था कि कैसे रेलवे स्टेशन पर शौचालय के पानी से लोगों को चाय, कॉफी पिलायी जा रही है। उन्होंने यह खुलासा अपने एक ब्लॉग के जरिए भी किया है, जिसे आप यहां पढ़ सकते हैं-  

लोग आपके खाने मे शौच मिला रहे हैं

मानो सामूहिक सम्मोहन किया गया हो। आज सुबह (हाल ही में) एक शो किया अपने चैनल पर जिसमें भारतीय रेल का पर्दाफाश किया था। मुद्दा ये था कि जो खाना आप खाते हैंउसमे शौच के पानी का इस्तेमाल हो रहा है और ये पहली बार नहींखुद मैंने इसका एक्सपोज कुछ दिनों पहले किया था जिसमें शौच के पानी से लोगों को चाय, कॉफी पिलायी जा रही थी। जब इसका प्रसारण हुआ तब कई ऐसे लोग सामने आए जो इसमें भी सरकार की तरफदारी करते दिखे। मैंने यही मुद्दा उठाया कि जो लोग आपके खाने मे शौच मिला रहे हैंक्या उन्हे सिर्फ फाइन करके छोड़ा जा सकता हैक्या उनपर पाबंदी नहीं लगायी जानी चाहिएऔर ऐसे मे सरकार का रवैय्या इतना ढीला क्यों है?

आप विश्वास नहीं करेंगे कि कुछ लोग इस मुद्दे पर भी रेलवे मंत्रालय के पक्ष मे दिखाई दिए। आप कुछ लोगों के ट्वीट्स पढ़ सकते हैं। ध्यान से देखिए इन्हें। विश्वास नहीं होगा। उनका मानना था कि इससे ज्यादा और क्या किया जा सकता है। ये भी कि आर्थिक दंड तो बगैर टिकिट की यात्रा के लिए भी होता है और इसके लिए भी सिर्फ यही होना चाहिए।


सरकार ने अच्छा किया। यानी कि वही शौच परोसने वाले कॉन्ट्रैक्टर हमारे बीच फिर एक्टिव हो गए हैंन जाने अब क्या परोसेगेउन्हे इस बात की कोई चिंता नहीं है। मल-मूत्र खा लेंगे मगर मोदी सरकार की आलोचना बर्दाश्त नहीं करेंगे। कुछ लोगों ने तो सीधा ठीकरा जनता पर फोड़ डाला कि ये जनता अपने गिरेबां मे झांक कर देखे। इसकी जिम्मेदारी रेलवे मंत्रालय की नहीं हो सकती। यानी कि ट्रेन लेट होएक्सिडेंट होते रहेंखाने मे शौच परोसा जाता रहेमगर मोदी सरकार से कोई सवाल नहीं! हम 'गू' खा लेंगेमगर ये सरकार कुछ गलत नहीं कर सकती। क्या लोगों के जेहन मे इस कदर 'सियासी गू' भर दिया गया हैकि हम सवाल ही नहीं करेंगे और जो करेगा उसे ना सिर्फ खामोश करेंगे, बल्कि उसके खिलाफ हर किस्म का झूठा और घटिया प्रोपोगंडा चलाएंगे 

क्या सत्तासीन लोगों को आभास है कि घृणा और नफरत की सियासत ने हमें किस मोड़ पर ला दिया है?

कठुआ और उन्नाव में रेप पर हम आरोपी के पक्ष मे खड़े हो जाते हैं। ऐसा पहले होता देखा है कभीन सिर्फ उसके पक्ष मे बल्कि बीजेपी नेताओं की शर्मनाक हरकत को जायज ठहराने का जरिया ढूंढते हैंपोस्टमार्टम रिपोर्ट को गलत ढंग से पेश किया जाता हैसच सामने आए। जरूर आए। मगर झूठ का सहारा क्योंउन्नाव मे गैंग रेप मे विधायक के पक्ष मे जिस तरह योगी सरकार ने सार्वजानिक तौर पर और अदालत के सामने अपनी नाक कटवाई हैये तो अप्रत्याशित है! ऐसा कब हुआ है जब सरकार रेपिस्ट के साथ खड़ी दिखाई देती हैऔर जनता मे इस बात का कोई आक्रोश नहींऔर ये सब नफरत के चलतेमाफ कीजिए ये भक्ति नहीं है। ये एक श्राप है। एक ऐसा काला श्राप जो आपको आने वाले वक्त मे भुगतना होगा। जब आपने नाकाम सरकार से सवाल करना बंद कर दिया था।

हिंदी की बड़ी लेखिका ने ऐसा क्यों कहा...


मुझे ताज्जुब नहीं कि लोग खाने मे शौच बर्दाश्त कर सकते हैंधर्म के नाम पर खुला खेल खेल रही सरकार से सवाल नहीं कर सकते! क्योंकि यही शौच पिछले कुछ अरसे से उन्हें हर जगह परोसा जा रहा है। टीवी चैनलों पर खबरों के नाम पर घृणा और दोहराव पैदा करनालोगों के खिलाफधर्म विशेष के खिलाफ माहौल बनाना। दंगा तक भड़काने से परहेज ना रखना और जो समझदारी की बात करेउसे खामोश कर देना। सूचना- प्रसारण मंत्रालय से अदृश्य फरमान जारी करके लोगों की जुबान पर अंकुश लगानातो जब नफरत परोसी जाएगी तो दिमाग मे तो गोबर ही तो भरेगा नातब लोगों को शौच युक्त खाना खाने मे क्या दिक्कत होगीजब आए दिन उन्हें न्यूज चैनल के जरिए यही परोसा जा रहा होजब चुनावी मंचों पर श्मशानकब्रिस्तान जैसी बातें की जाती हो! जब देश के प्रधानमंत्री विदेश जाकर कहते हों कि रेप पर सियासत नहीं होनी चाहिए और कुछ दिनों बाद यानी एक हफ्ते के अंदर उसे भूल करकर्नाटक की सियासी भूमि में उसी बात का गला घोंट देते हों?

जिन्ना मर गए। उनकी एक तस्वीर अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय मे होगीमगर उस मुद्दे को दोबारा उठा कर हमने लाखों जिन्ना अपने टीवी स्टूडियो के जरिए देश भर मे जन्म दे दिए!

किसी ने ये नहीं पूछा कि बीजेपी सांसद सतीश गौतम इस मुद्दे को अब क्यों उठा रहे हैंक्योंकि आजादी के इतने साल बाद भी मोदी सरकार आपको पीड़ित बने रहने का पाठ पढ़ा रही है कि बेचारा हिंदू अब भी मुगल काल की तरह इन अत्याचारी मुसलमानों के हाथ मे बंधक है। और जब हम सरकारी प्रोपेगेंडा जिसे कुछ न्यूज चैनल के जरिए प्रसारित किया जाता हैपर विश्वास करते हैंतो इसी तरह हम अपने भोजन में भी मल-मूत्र बर्दाश्त कर लेते हैं।

ये बना दिया है भक्ति ने आपको। जो व्यक्ति हमारा नायक होता हैवो हमें प्रेरित करता हैबेहतर बनने के लिएमगर हम तो और भी रसातल मे जा रहे हैं। गलत बयानीझूठ मानो अब उपलब्धियां हो गई हैं! किसी के बारे मे कुछ भी बोल दोबगैर प्रमाण के उस पर विश्वास करके इंसान को सूली पर लटका दिया जाता है। त्वरित सियासी फायदे के लिए बीजेपी इस देश को कहां ढकेल रही है क्या अंदाज़ा है आपकोक्या अंदाज़ा है पार्टी के नेताओं कोवो भी क्या करेंगे जब घृणा की गंगोत्री ऊपर से बहती हो तो! दुखद है। और मुझे दुख मौजूदा पीढ़ी का नहींचिंता अपने बच्चों की है कि विरासत मे उन्हे क्या दिए जा रहा हूं!

नीचे विडियो पर क्लिक कर देखिए कैसे ट्रेन में टॉयलेट के पानी से बनाई जाती है चाय...

 



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