वरिष्ठ पत्रकार अभिज्ञान प्रकाश बोले, पत्रकार का सीना भी 56 इंच का होता है

वरिष्ठ पत्रकार अभिज्ञान प्रकाश बोले, पत्रकार का सीना भी 56 इंच का होता है

Wednesday, 18 October, 2017

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

क्षेत्रीय पत्रकार मीडिया की असल ताकत हैं क्योंकि वे किसी भी योजना के लाभ और हानियों व उनके सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव से सीधे वाकिफ रहते हैं। ये बात वरिष्ठ टीवी पत्रकार अभिज्ञान प्रकाश ने हाल ही आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही। उन्होंने कहा कि निष्पक्षता ही मीडिया का सबसे बड़ा गुण होना चाहिए।

अपने संबोधन में उन्होंने आगे कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में और फील्ड में तमाम दबाव झेलकर भी खबरें लाने वाले पत्रकार ही असल पत्रकारिता की रीढ़ हैं। स्टूडियो में या ऑफिस में बैठकर भले ही नामी-गिरामी पत्रकार खबर को मूर्त रूप देते हैं, पर कम संसाधनों में कई तरह के दबाव झेलकर भी खबरों के लिए मेहनत तो फील्ड के पत्रकार को करनी होती है।

अभिज्ञान प्रकाश ने ये बातें तब कहीं, जब वे हाल ही में पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय और एनयूआईजे के संयुक्त तत्वाधान में दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित मीडिया वर्कशॉप में देश भर के पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं को सही तथ्यों के साथ जनता के सामने लाना पत्रकार का ही कर्तव्य है। अगर सरकार की कोई नीति अच्छी है तो उसकी तारीफ की जानी चाहिए क्योंकि किसी भी सरकार का मूल मकसद जन कल्याण ही होता है। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी ने कहा था कि जनकल्याणकारी नीतियों के एक रुपए में केवल पंद्रह पैसा ही निचले स्तर तक पहुंचता है, क्यों न अब मीडिया पंद्रह पैसे की जगह 70 पैसे जनता तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाए।

वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश ने आगे कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन पर सभी पक्षों को बराबर महत्व दिया जाए, यही तो पत्रकारिता है। पत्रकार विनर होता है, जो किसी विषय पर अन्य लोगों से अधिक जानकारी रखता है। जनता को आपसे अपेक्षाएं भी होती हैं, क्योंकि आप प्रभाव रखते हैं। इसलिए अपनी हिम्मत और ताकत पहचानिए।

पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लोगों को पारंपरिक तरीके से किसी भी सरकार की नीतियों की आलोचना नहीं करनी चाहिए, लेकिन हम लोगों में यह बुराई घर कर गई है कि किसी भी पॉलिसी के लागू होते ही हम अपने पूर्व के कड़वे अनुभवों पर उन्हें न कर देते हैं। इस दौर में पारंपरिक मीडिया का स्वरूप बदला है और सूचना मिलने की गति तेज हुई है इसीलिए हमें वक्त की जरूरत के हिसाब से खुद में सुधार करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह समझ लेना जरूरी होगा कि कोई भी पत्रकार या अखबार छोटा या बड़ा नहीं होता, अगर देश का कोई नेता 56 इंच के सीने की बात करता है, तो हम भी यह दावा कर सकते हैं कि हमारा भी सीना 56 इंच का है।

 

 

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