भास्कर की बेबाकी पसंद न होने पर जब पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने रमेश अग्रवाल को बुलाया...

Wednesday, 12 April, 2017

शरद गुप्ता ।।

एडिटर, नेशनल न्यूज रूम

दैनिक भास्कर, भोपाल

sharad-guptaरमेश चंद्र अग्रवाल ने कभी पत्रकारिता की कोई पढ़ाई नहीं की लेकिन गुना बहुत। उनके पिताजी द्वारका प्रसाद अग्रवाल ने दैनिक भास्कर की नींव रखी। अपने हाथ से छापते अपने हाथ से बांटते। यह सब रमेश अग्रवाल ने बचपन में ही देखा और सीखा। 1978 में पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने अखबार को संभाला तब दैनिक भास्कर के सिर्फ दो संस्करण थे ग्वालियर और भोपाल से। उस समय मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा अखबार नवभारत था फिर नईदुनिया और उसके बाद दूसरे अखबार, बड़े अखबारों की गिनती में दैनिक भास्कर नहीं आता था।

फिर 1984 में भोपाल गैस कांड हुआ हजारों लोग जहरीली गैस का शिकार हुए। तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह अपनी मीडिया मैनेजमेंट के लिए मशहूर थे। उन्होंने लगभग सभी अखबारों को निगेटिव खबर न छापने के लिए राजी कर लिया था। लेकिन दैनिक भास्कर लगातार ढेर सारी फोटो के साथ लोगों की पीड़ा तकलीफ और मजबूरी की कहानी छापता रहा। खास तौर पर प्रशासन की नाकामी। लोगों ने दूसरे अखबारों को छोड़कर दैनिक भास्कर की खबरें पसंद की। अर्जुन सिंह को भास्कर की बेबाकी पसंद नहीं आई। उन्होंने एक शाम रमेश अग्रवाल को बुला भेजा। साम दाम दंड भेद सभी का इस्तेमाल किया। रमेश चंद्र जी लौट कर आए सभी कर्मचारियों को इकट्ठा किया और हालात बयान किए। फिर घोषणा की - आप बताइए ऐसे में क्या होना चाहिए?  हमारे सामने दो रास्ते हैं पहला कि सभी की तरह हम भी प्रशासन के सामने झुक जाए और लोगों की नहीं प्रशासन की तरफदारी करें। अच्छा विज्ञापन मिलेगा। आप लोगों की तनख्वाह भी बेहतर हो सकती हैं।

दूसरा रास्ता थोड़ा मुश्किल है हम मुख्यमंत्री की न सुने। हम जनता की बात करें। उनके दुख तकलीफों को हाइलाइट करें। बहुत संभव इससे प्रशासन नाराज हो सकता है। हमारी लाइट काट दी जाए। प्रेस पर ताला लगाना पड़े। लेकिन जनता में हम लोकप्रिय हो जाएंगे।

सभी कर्मचारियों ने एक स्वर से कहा रमेश जी अब संघर्ष का रास्ता चुनेंगे। और इस तरह धीरे-धीरे दैनिक भास्कर जनता की आवाज बन गया इसमें बड़ा रोल रमेश चंद्र जी का था जिन्होंने सरकार के आगे झुकने के बजाय उससे लोहा लेना बेहतर समझा। साथ ही बड़ा शरीर उनके उन साथियों को जाता है जिन्होंने सुविधा और तनख्वाह में बढ़ोतरी के बजाय संघर्ष का रास्ता चुनना पसंद किया।

दैनिक भास्कर में उन्होंने पॉलिसी बनाई रीडर्स फर्स्ट। हर बात में पाठकों की राय लेना अखबार शुरू करने से पहले, किसी भी बड़े प्रोजेक्ट पर, किसी भी बड़ी खबर पर- हर चीज पर पाठकों का फीडबैक।

रमेश चंद्र जी के लिए सबसे बड़ी बात थी। यह 2001 की घटना से साफ होता है जब सेलिना जेटली मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में फाइनल राउंड के लिए चुनी गई। 26 मई 2001 को दैनिक भास्कर ने अपने पहले पन्ने पर ऊपर आधे हिस्से में सेलिना जेटली का कुछ रिवीलिंग फोटो छापा अगले ही दिन सुबह से रमेश चंद्र जी को पाठकों के इतने फोन आए, इतने फोन आए कि वे परेशान हो गए। कुछ लोगों ने उस फोटो को काटकर उन्हें वापस पोस्ट कर दिया। सभी का कहना था इस तरीके के फोटोग्राफ वाले अखबार को भी अपने घर में नहीं रख सकते। यह शालीनता की सीमा का उल्लंघन था। इसके बाद रमेश चंद्र जी ने पॉलिसी बना दी कि दैनिक भास्कर में कभी भी कोई ऐसी फोटो नहीं छप सकेगी जो पाठक अपने परिवार के साथ न देख सकें।

समाचार4मीडिया देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया.कॉम में हम आपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं।

पोल

आपको समाचार4मीडिया का नया लुक कैसा लगा?

पहले से बेहतर

ठीक-ठाक

पहले वाला ज्यादा अच्छा था

Copyright © 2017 samachar4media.com