न्‍यूज की दशा और दिशा पर Star India के CEO उदय शंकर ने बताई ये खास बातें...

Tuesday, 18 July, 2017

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।


'स्टार इंडिया' (Star India) के चेयरमैन और सीईओ उदय शंकर आज काफी लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं। हालांकि उन्‍हें यह सफलता इतनी आसानी से नहीं मिली। इसका श्रेय उनकी लगनमेहनत और धैर्य को जाता है। इसके अलावा भी उदय शंकर में कुछ ऐसी खूबियां हैं जो उन्‍हें दूसरों से थोड़ा अलग बनाती हैं।

यह उदय शंकर की निर्णय लेने की क्षमता और दूरदर्शिता का परिणाम ही है कि वर्ष 2007 में उनके कमान संभालने के बाद से स्‍टार इंडिया देश की सबसे बड़ी टेलिविजन ब्रॉडकास्‍टर बनी हुई है। कहा जा सकता है कि ‘स्‍टार इंडिया’ की तरक्‍की में शंकर की कुशाग्रता और रिस्‍क लेने की क्षमता का बहुत बड़ा योगदान है। प्रोग्रेसिव कंटेंट के द्वारा इसकी प्रोग्रामिंग में तेजी से बदलाव हो रहा है।

उन्‍होंने न सिर्फ प्रादेशिक में तेजी से विस्‍तार किया बल्कि स्‍पोर्ट्स के क्षेत्र में भी बडा निवेश किया। इसके लिएउन्‍होंने ‘बीसीसीआई’ और ‘आईसीसी’ मैचों के मीडिया अधिकार खरीदे, ‘सत्‍यमेव जयते’ औरनई सोच’ जैसे इनिविएटिव्स द्वारा सामाजिक बदलाव का एजेंडा सेट किया। यही नहींतकनीकि रूप से भी उन्‍होंने काफी काम किया जैसे ‘हॉट स्‍टार’ शुरू किया और आईपीएल के डिजिटल अधिकार खरीदे एवं देश में कबड्डी को दोबारा से नए कलेवर यानी टेलिविजन स्‍पोर्ट के रूप में पेश किया। इसके अलावा उन्‍होंने विभिन्‍न स्‍पोर्टिंग लीग में निवेश किया। अपनी इन्‍हीं सोच और कामों की बदौलत उदय शंकर ने भारतीय मीडिया और ऐंटरटेनमेंट के क्षेत्र में प्रभावशाली व्‍यक्तियों की सूची में अपना नाम दर्ज कराया। अभी भी इस दिशा में उनका प्रयास निरंतर जारी है। इस बीच ‘21st Century Fox’ (स्‍टार इंडिया इसी के तहत काम करती है) ने उदय शंकर पर भरोसा जताते हुए कहा है कि कंपनी वर्ष 2018 में तय 500 मिलियन के लक्ष्‍य को हासिल करने के लिए सही ट्रैक पर चल रही है और वर्ष 2020 तक यह एक बिलियन हो जाएगा।

सिमरन सभरवाल से बातचीत में उदय शंकर ने अपनी अब तक की यात्रा के बारे में बताया। इसके अलावा उन्‍होंने यह भी बताया कि कैसे उन्‍होंने चुनौतियों को अवसर में बदला और आज भारतीय न्‍यूज की क्‍या दशा है।

प्रस्‍तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश :

अब तक का सफर

यदि पीछे मुड़कर देखें तो जिंदगी काफी अच्‍छी रही है। अब लोग मानते हैं कि समाज में बदलाव लाने व गलत चीजों को सही करने में पत्रकार की बहुत अहम भूमिका है। पॉलिटिकल जर्नलिस्‍ट, एनवॉयरमेंटल जर्नलिस्‍ट और टेलिविजन जर्नलिस्‍ट के रूप में मैंने सभी बीट पर काम किया है।

मैं कह सकता हूं कि मैंने समाज की बेहतरी के लिए बिना शोरशराबे के काफी काम किया है। मेरी लिए यह सबसे बड़ी बात है कि मीडिया में लगभग 30 साल गुजारने के बाद आज भी मैं उतना ही रोमांचित हूं जितना मैं पहले साल था और इससे मुझे बहुत संतुष्टि मिलती है।  

 ‘आउटसाइडरके रूप में

स्‍टार इंडियाको जॉइन करते समय मैं इस क्षेत्र के लिए एक तरह से बाहरीथा, जिसे ऐंटरटेनमेंट का कोई आइडिया नहीं था। यहां तक कि मैं कभी ऐंटरटेनमेंट का कंज्‍यूमर भी नहीं रहा और मैंने एक भी डेली शो नहीं देखा था। मैं न्‍यूज देखता था, कुछ स्‍पोर्ट्स और मूवीज भी देख लेता था। स्‍टारदेश की सबसे बड़ी ऐंटरटेनमेंट कंपनी थी। हालांकि शुरू में इस बात से मैं काफी डरा हुआ था लेकिन अब यदि पुरानी बातें सोचें तो लगता है कि यह सही था। शुरू में मैं अक्‍सर इस बात से चिंतित रहता था कि मैं जो चीजें कर रहा था, वह सही हैं या गलत जबकि इस बात ने मुझे ज्‍यादा विचारशील और चिंतक बना दिया। मैंने लोगों से बातचीत कर और सवाल पूछकर चीजों को समझने की कोशिश की कि यह क्‍या हो रहा है, क्‍यों हो रहा है और क्‍या हमने जो किया वह सही था। ऐसी स्थिति में मेरे पत्रकारीय बैकग्राउंड से चीजों को समझने में काफी मदद मिली कि चीजें कैसी चल रही हैं और इन्‍हें किस तरह बेहतर किया जा सकता है। 

स्‍टार इंडियामें सबसे ऊंचे पद पर पहुंचने की कहानी

मैं कंपनी के कई लोगों से मिला (तब इसे न्‍यूज कॉर्प कहते थे), जिनमें तत्‍कालीन ग्‍लोबल प्रेजिडेंट और सीईओ पीटर चर्निन भी शामिल थे। स्‍टार न्‍यूजका एडिटर और सीईओ होने के नाते तब मैं स्‍टारका हिस्‍सा था लेकिन मुझे यह नहीं पता था कि मुझे स्‍टार इंडियाका प्रमुख बनाया जा रहा था, क्‍योंकि मैं दूसरी तरह का काम कर रहा था। जब मुझे यह पद ऑफर किया गया तो सबसे पहले मैंने यही सोचा था कि वे कैसी गलती कर रहे हैं, वे क्‍यों मुझे यह पद ऑफर कर रहे हैं। मैंने इसके बारे में काफी सोचा और महसूस किया कि यह मेरे लिए अद्भुत अवसर और चुनौती हो सकती है। मुझे यह जॉब हॉन्‍गकॉन्‍ग में ऑफर की गई थी। मैंने अपने परिवार को वहां बुलाया लेकिन मेरी पत्‍नी का मानना था कि स्‍टार काफी जटिल है और यहां काफी परेशानियां हैं। हम तब दिल्‍ली में रहते थे और उसने कहा था, ‘हम अपनी जिंदगी में यह सब क्‍यों करना चाहते हैं?’ उसने कहा था कि इसे भूल जाओ और उन्‍हें धन्‍यवादकहकर मना कर दो। मेरी बेटी का मानना था कि मुझे मीडिया में इतनी बड़ी जॉब का ऑफर नहीं छोड़ना चाहिए। वैसे भी मैं कुछ अलग करना चाहता था। एक पत्रकार को नयापन और एडवेंचर बहुत पसंद होता है और इस नौकरी में मुझे यह दोनों ही मिलेंगे। यही कारण है कि मैं दस साल से यहां पर काम कर रहा हूं। स्‍टारसमय-समय पर मुझे कुछ अलग करने का अवसर देता है जो काफी अलग और महत्‍वाकांक्षी होता है। स्‍टार के अपने सफर के बारे में आने वाली पीढ़ी से यही कहूंगा कि बेधड़क अपना सफर जारी रखो और ऐसी जगह जाओ, जहां अब तक कोई नहीं गया है।

चुनौतियां बहुत बड़ा अवसर हैं

मैं चुनौतियों को कभी भी चुनौतियों के रूप में नहीं बल्कि बड़े अवसर के रूप में देखता हूं। हमने कई चुनौतियों को अपने फायदे के रूप में लिया और स्‍टार इंडियाको देश की सबसे बड़ी कंटेंट कंपनी में परिवर्तित करने में सफल रहे। स्‍टार इंडियाका देश के लोगों के साथ भावनात्‍मक जुड़ाव है और यह हमारे लिए गर्व की बात है।

जब मैं यहां आया था तो यहां की लीडरशिप बदल चुकी थी, कई वरिष्‍ठ लोग यहां से छोड़कर जा चुके थे। स्‍टार इंडियाकाफी सफल कंपनी थी और सबसे पहली चुनौती यही थी कि सफलता के इस सफर को आगे भी जारी रखा जाए। इस बात ने हमें कुछ अलग हटकर सोचने के लिए मजबूर कर दिया। हमने एक काम यह किया कि बालाजी शोजऔर कौन बनेगा करोड़पतिको लेकर निर्णय लिया। इसमें हमने कौन बनेगा करोड़पतिके अधिकार छोड़ दिए और बालाजी शोजभी बंद कर दिए।       

हमने स्‍टार प्‍लस के कंटेंट, ब्रैंड पोजीशनिंग और इसके बारे में लोगों की राय में काफी बदलाव किया। हिन्‍दी ऐंटरटेनमेंट में स्‍टार काफी सफल था लेकिन कंटेंट के मामले में स्‍टार आज की तारीख में सबसे बड़ी मीडिया कंपनी बन चुकी है। आज विभिन्‍न भाषाओं में इसका मार्केट है और वहां इसकी बड़ी दर्शक संख्‍या है। प्रादेशिक बिजनेस में स्‍टार ने काफी देरी से प्रवेश किया। हमारे प्रतिद्वंद्वी काफी आगे थे और उन तक पहुंचना बड़ी चुनौती थी लेकिन हमने वह सब मैनेज कर लिया।

किसी जमाने में हमारे देश में खेलों को बहुत महत्‍व दिया जाता था। लेकिन हमने देखा कि लोग इनसे दूर होते जा रहे हैं। इसके बाद हमने हमने स्‍पोर्ट्स के क्षेत्र में प्रवेश किया और क्रिकेट के अलावा कई कई लीग जैसे- प्रो कबड्डी लीग’ ‘द इंडियन सुपर लीग, प्रीमियर बैडमिंटन लीग, हॉकी इंडिया लीगशुरू कराईं। इससे पहले आपको देश में क्रिकेट या इंटरनेशनल स्‍पोर्ट्स ही देखने को मिलता था। लेकिन आज कबड्डी लीग काफी बड़ी हो चुकी है। हमने हाल ही में चार नई टीमों के साथ कबड्डी फ्रेंचाइजी का विस्‍तार किया है, जिसमें देश के बड़े उद्योगपति हिस्‍सा ले रहे हैं और इनकी डिमांड भी बढ़ती जा रही है।

बिजनेस बढ़ाने पर ज्‍यादा ध्‍यान

मैं कभी भी स्‍पॉन्‍सरशिप, रेवेन्‍यू, ऐडवर्टाइ‍जिंग और डिस्‍ट्रीब्‍यूशन से इनकम के पीछे नहीं भागता हूं। आप जो भी करते हैं, उस हिसाब से आपको आउटपुट मिलता है। लेकिन मूल रूप से हम ऐसे बिजनेस में हैं, जहां पर हमारा अपने व्‍युअर्स से गहरा नाता है। इस रिलेशनशिप को ड्रामा, मूवीज और स्‍पोर्ट्स के द्वारा तैयार किया जाता है। ऐसा इसलिए भी हो सकता है क्‍योंकि मेरा बैकग्राउंड और ट्रेनिंग ऐसी रही है कि मैं पैसे के पीछे नहीं भागता हूं। मैं कंटेंट, व्‍युअर्स और उनकी उम्‍मीदों पर ध्‍यान देता हूं और यह देखता हूं कि मेरा चैनल और बिजनेस कैसे इन्‍हें पूरा कर सकता है। जब ऐसा होता है तो लोग आपसे जुड़ते हैं। इसके बाद ऐडवर्टाइजर्स और पैसा भी उसके पीछे आने लगते हैं।

जब हमने प्रो कबड्डी लीग लॉन्‍च की थी तो मैंने अपने कुछ कॉरपोरेट दोस्‍तों को बुलाया था और उनसे कबड्डी की स्‍पॉन्‍सरशिप लेने के लिए कहा था। लेकिन उन्‍होंने ऐसा नहीं किया। अब हमने कबड्डी की स्‍पॉन्‍सरशिप सिर्फ इंडियन प्रीमियर लीग को सौंपी है। ऐसा इसलिए किया गया है क्‍योंकि स्‍पोर्ट्स में निवेश को लेकर स्‍टार काफी गंभीर है और लगातार निवेश कर रहा है। हम जानते थे कि बिना यह सोचे कि यह फायदेमंद है अथवा नहीं, हमें इसमें ज्‍यादा से ज्‍यादा निवेश करने की जरूरत थी। इस कंपनी के साथ सबसे बड़ी चीज है कि इसके सिद्धांत काफी ग्‍लोबल हैं। 21 सेंचुरी फॉक्‍सऔर मर्डोक का मानना है कि पैसे कमाने की सोचने से पहले कंटेंट और बि‍जनेस पर ध्‍यान देना होगा। इस इंडस्‍ट्री में कई लोग ऐसे हैं जो बिनजेस शुरू करते ही परेशान हो जाते हैं कि पैसा कब और कहां से आएगा। यह तो वही बात हो गई कि बच्‍चे के जन्‍म लेते ही यह सोचना कि वह आईआईटी अथवा आईआर्इएम में दाखिला लेगा। काम करने का यह तरीका नही है। आपको पहले बच्‍चे को बड़ा करना होगा, उसे पढ़ाना-लिखाना होगा इसके बाद ही वह जीवन में कुछ बेहतर कर पाएगा। हम भी यही सोचते हैं और सबसे पहले अपने बिजनेस को बढ़ावा देते हैं। हम व्‍यावसायिक संस्‍थान हैं और हमें भी पैसे कमाने होते है लेकिन हम इसमें जल्‍दबाजी नहीं करते हैं।

हमारी दूसरी चुनौती देश और कंपनी के लिए अच्‍छा करने की महत्‍वाकांक्षा है, जिस पर हम फोकस करते हैं। डिजिटल में काम करने को लेकर हम बहुत उत्‍साहित हैं। पांच साल पहले जब हमने डिजिटल के बारे में सोचा था, तब कोई भी इसके बारे में नहीं सोच रहा था। कई कंपिनयों ने जिन्‍होंने स्‍पोर्टिंग के प्रसारण अधिकारों की नीलामी में भाग लिया था, उन्‍होंने डिजिटल अधिकारों पर ज्‍यादा ध्‍यान नहीं दिया था। वर्ष 2012 में जब हमने स्‍पोर्ट्स में प्रवेश किया था, तब हमने बीसीसीआई के अधिकारों के साथ ही इसके डिजिटल अधिकारों की नीलामी में भी भाग लिया था हालाकि हमारे पास इसका इस्‍तेमाल करने के लिए प्‍लेटफार्म नहीं था। ब्रॉडबैंड की दिक्‍कत होने के कारण देश विडियो के लिए तैयार नहीं था। उस समय देश में न तो इतने स्‍मार्ट फोन थे और न ही वाई-फाई था। हमने बदलाव की इस प्रक्रिया में भाग लेने का निर्णय लिया। इंडिया ने सभी लोगों को गलत साबित कर दिया और हाल में आई ‘Mary Meeker Internet trends 2017की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल हॉट स्‍टारदुनिया में आठवां सबसे ज्‍यादा डाउनलोड किए जाने वाला एप था। हम हॉट स्‍टार को दुनिया का सफलतम डिजिटल प्‍लेटफॉर्म बनाना चाहते हैं और हम इसमें लगातार निवेश कर रहे हैं।

दूरदर्शिता

जिन चीजों को मैंने दस साल पहले किया था, उन पर मैं अक्‍सर अपने आप से सवाल पूछता हूं कि क्‍या मैंने सही किया था। मैंने वह सारे काम खुद से किए। यदि मैं अपने आप से सवाल नहीं करता और अपना दिमाग नहीं लगता तो मैं कुछ भी नहीं सीख पाता। आप कोई भी चीज इनपुट, ऑप्‍शंस और उस समय की परिस्थितियों के अनुसार करते हैं। कई बार मुझे लगता था कि मुझे केबीसीके अधिकार छोड़ देने चाहिए थे। मुझे लगता है कि यह सही था क्‍योंकि इसने मुझे नए कंटेंट के बारे में सोचने पर मजबूर किया और हमने दूसरी चीजों पर सही से फोकस किया।    

क्‍या आप पांचवी पास से तेज हैंस्‍टार में मेरी पहली बड़ी लॉन्चिंग थी और यह बुरी तरह से फेल हुई थी। मैं सोच रहा था कि मैं इसमें अलग क्‍या कर सकता था। इससे मुझे और कंपनी को बहुत कुछ सीखने को मिला और आज हम अच्‍छी स्थिति में हैं। हमने कुछ अलग हटकर काम भी किया है, ‘सत्‍यमेव जयतेकी सफलता से आप इसे बेहतर समझ सकते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि आप अपने आप से सवाल करें और विश्‍लेषण करें। भले ही आप इसके बारे में कुछ नहीं कर सकें।        

सफल होने पर बढ़ जाती है चिंता

जब कोई चीज बहुत सफल हो जाती है तो संस्‍था का प्रमुख होने के नाते मैं ज्‍यादा चिंतित हो जाता हूं। क्‍योंकि सफलता आपको लापरवाह बना देती है। इसलिए यदि संस्‍थान को सफलता मिलती है तो उसे चिंता जरूर करनी चाहिए। इसका कारण है कि यदि कोई चीज आज सफल है तो इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि वह कल भी उतनी ही सफल होगी। यदि कोई चीज असफल हो जाती है तो पूरा संस्‍थान एक साथ मिलकर आ जाता है और जांच करता है कि कहां पर गलती हो गई। इससे काफी सीखने को मिलता है। कहा जा सकता है कि असफलता से हमें काफी चीजें सीखने को मिलती हैं लेकिन सफलता के साथ बड़ी जिम्‍मेदारी आती है।  

 मीडिया और ऐंटरटेनमेंट इंडस्‍ट्री में पिछले दशक में हुए बड़े बदलाव

पिछले दशक की बात करें तो इंडस्‍ट्री में काफी बदलाव हुए हैं लेकिन शायद यह पर्याप्‍त नहीं हैं। जब मैं स्‍टार इंडिया में आया था तो इंटरनेट विडियो का जमाना नहीं था। यू ट्यूबभी तब शुरुआती अवस्‍था में था। यहां तक कि मीडिया कंपनियों की वेबसाइट भी नहीं थी और कंटेंट का डिजिटल डिस्‍ट्रीब्‍यूशन नहीं था। तब डीटीएचभी नया आया था और इसकी पहुंच काफी कम थी। तब देश में एचडी नहीं आया था और पूरे देश में एनालॉग केबल टीवी चल रहा था। पिछले दशक में सबसे ज्‍यादा बदलाव टेलिविजन में हुए हैं लेकिन मेरा मानना है कि कई चीजों में अभी बहुत कुछ बदलाव होना चाहिए। आजकल सभी चीजें टेक्‍नोलॉजी और साइंस पर चल रही हैं और ये मीडिया व ऐंटरटेनमेंट इंडस्‍ट्री को भी प्रभावित कर रही हैं। लेकिन इन परिवर्तनों के लिए हमने पर्याप्‍त तरक्‍की नहीं की है। किसी भी काम को करने की हमारी पुरानी वाली मानसिकता ही बनी हुई है फिर चाहे वह कंटेंट हो, डिस्‍ट्रीब्‍यूशन हो या ऐड सेल्‍स। मीडिया एक बिजनेस बन गया है, जहां पर टेक्‍नोलॉजी अभी भी कम और सतही तौर पर काम कर रही है। हालांकि काफी बदलाव हो चुके हैं लेकिन कई क्षेत्रों में अभी पर्याप्‍त बदलाव नहीं हुए हैं और चीजें पुराने ढर्रे पर ही चल रही हैं।

आगे का रास्‍ता

न सिर्फ प्रॉडक्‍शन बल्कि आइडिया के रूप में भी कंटेंट काफी अच्‍छा कर रहा है। पूरे पैकेज की क्‍वालिटी और व्‍यूअर्स का एक्‍सपीरिएंस भी आने वाले समय में बेहतर हो जाएगा। यह विडंबना ही है कि इतना ढेर सारा कंटेंट होने के बावजूद लोगों की शिकायत लगातार बनी हुई है कि उनके पास देखने के लिए पर्याप्‍त मात्रा में अच्‍छा कंटेंट नहीं है। प्रोफेशनल मीडिया कंपनियों के लिए यह एक अवसर के साथ चुनौती भी है कि वह इतने ढेर सारे कंटेंट के बीच अपने कंटेंट को विशिष्‍ट और सबसे बेहतर बनाएं। मुझे नहीं लगता कि हम टेक्‍नोलॉजी का ज्‍यादा इस्‍तेमाल कर रहे हैं। मीडिया को पहले भौगोलिक रूप से परिभाषित किया जाता था। यानी, पहले किसी खास मार्केट के लिए कंटेंट तैयार कर उसे डिस्‍ट्रीब्‍यूशन के लिए केबल ऑपरेटर को दिया जाता था। उस एरिया से आगे जाना न तो संभव था और न ही जरूरी। लेकिन आज कोई भी व्‍यक्ति छोटे से गांव में बैठकर भी न सिर्फ कंटेंट को तैयार कर सकता है बल्कि उसे पूरी दुनिया में डिस्‍ट्रीब्‍यूट कर सकता है। आजकल कंप्‍टीशन भी ग्‍लोबल हो गया है। पहले भारतीय कंपनियां सिर्फ भारतीय भाषा में ही कंटेंट तैयार करती थीं लेकिन आज अमेरिकी कंपनियां जैसे- अमेजॉनऔर नेटफ्लिक्‍सभी इंडिया के लिए कंटेंट तैयार कर रही हैं। मुझे पूरा विश्‍वास है कि आने वाले समय में चीन की कंपनी भी यहां के लिए कंटेंट तैयार करेगी। इंडिया में हम भी कंटेंट तैयार कर उसे ग्‍लोबल स्‍तर पर बेचना शुरू कर सकते हैं। पहले के समय में जब डिस्‍ट्रीब्‍यून बिल्‍कुल स्‍थानीय था, अब वह ग्‍लोबल में बदल चुका है। आज के समय में कंटेंट को दोनों स्‍तरों पर ऑपरेट करने की जरूरत है। यानी वह ग्‍लोब और लोकल कंटेंट से प्रतिस्पर्द्धा करे और मार्केट की जरूरतों को पूरा करने के लिए ग्‍लोबल स्‍तर पर भी जाए। यही असली चुनौती है।

यह मेरे लिए चिंता की बात है और नेतृत्‍व के लिए चुनौती भी है। मीडिया और ऐंटरटेनमेंट सेक्‍टर अभी भी पुरानी मानसिकता पर काम कर रहा है हालांकि इंडस्‍ट्री काफी आगे निकल चुकी है। स्‍टारकी बात करें को इसकी प्रतिस्‍पर्धा किसी भारतीय मीडिया और ऐंटरटेनमेंट कंपनी से नहीं बल्कि ग्‍लोबल प्‍लेयर्स से है। अमेजॉनमीडिया कंपनी नहीं है लेकिन फिर भी यह दुनियाभर में मीडिया कंपनियों को टक्‍कर दे रही है। नेटफ्लिक्‍स’, ‘गूगलऔर फेसबुककी शुरुआत मीडिया कंपनी के तौर पर नहीं हुई थी लेकिन आज वे मीडिया कंपनी बन चुकी हैं। अब पुरानी मान्‍यताएं और भौगोलिक बंदिशें खत्‍म हो चुकी हैं। ऐसे में अपने देश में लीडरशिप, विजन और टैलेंट को एक बिजनेस तैयार करने के लिए बदलने की जरूरत है ताकि उसे भविष्‍य के लिए तैयार किया जा सके। हालांकि मैं इस बारे में आश्‍वस्‍त नहीं हूं कि मीडिया मालिक और लीडर्स इस समस्‍या के बारे में सोच रहे हैं। यह स्थिति ज्‍यादा दूर नहीं है बल्कि अभी यहां की यही स्थिति है।

अब न्‍यूज की स्थिति भी बदल चुकी है। अब लोग ब्रेकिंग न्‍यूज के लिए न्‍यूज चैनल्‍स और अखबारों का सहारा नहीं लेते हैं क्‍योंकि अब यह हर समय आपके मोबाइल हैंडसेट पर मौजूद है।  हो सकता है कि न्‍यूज चैनल्‍स अथवा अखबारों में आपको ब्रेकिंग न्‍यूज न मिले लेकिन फेसबुक, ट्विटर, गूगल और वॉट्सएप पर यह आपको जरूर मिल जाएगी। हम आजकल इसी तरह की दुनिया में रह रहे हैं और हमें इस तरह की दुनिया के लिए तैयार रहने की जरूरत है। मेरी चिंता इस बात को लेकर है कि हमारे देश में मीडिया मालिक और लीडर्स अभी तक पुरानी परिपाटी पर चल रहे हैं और वे अभी जमीनी हकीकत नहीं देख पा रहे हैं।  

सोशल मीडिया अपना अच्‍छा प्रभाव जमा चुकी है और कंटेंट का अच्‍छा सोर्स बन चुकी है लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह सभी चीजों को पीछे छोड़ देगी। अभी सोशल मीडिया के शुरुआत के दिन हैं क्‍योंकि यह डिजिटल एंटरप्राइज के दूसरे रूप में काम कर रही है। जब कहीं पर भी इस तरह की नई चीज होती है तो शुरुआत में चीजें काफी चरम पर पहुंच जाती हैं लेकिन समय के साथ ये चीजें सामान्‍य व संतुलित हो जाती हैं। हम अभी इस स्थिति से बहुत दूर हैं।

आने वाली पीढ़ी को तराशना (Grooming Gen-Next)

क्‍या आपको लगता है कि मीडिया इंडस्‍ट्री में टैलेंट भरा पड़ा है‍ ? ऐसा नहीं है। दरअसल, हमारे पास कोई प्रोग्राम ही नहीं है। स्‍टारकी बात करें तो हम हमेशा टैलेंट पर फोकस करते हैं और उन्‍हें अच्‍छी जगहों से अपने यहां लेकर आते हैं लेकिन सच्‍चाई यही है कि इतना काफी नहीं है। हमारे पास पूरे साल विश्‍व स्‍तर के प्रशिक्षक होते हैं और हम देश भर से प्रतिभाशाली युवाओं को लेकर आ रहे हैं। हम उन्‍हें एक साल तक भत्‍ता देते हैं और इसके बाद वे हमारे साथ पूरी तरह जुड़ जाते हैं और हमारे लिए काम करने लगते हैं। हालांकि यही सब चीजें बड़े स्‍तर पर होनी चाहिए। बड़ी कंपनियां जैसे- फेसबुकऔर गूगलइंजीनियरिंग कॉलेजों से छात्रों को हायर करती हैं लेकिन मीडिया इंडस्‍ट्री को टैलेंट की जरूरत न सिर्फ क्रिएटिविटी के लिए है बल्कि उसे बिजनेस और टेक्‍नोलॉजी पहलुओं को भी संभालना होता है।

हॉटस्‍टारमें दो साल से भी कम समय में हमने शायद देश में किसी दूसरी मीडिया और ऐंटरटेनमेंट कंपनी के मुकाबले ज्‍यादा इंजीनियर्स हायर किए है, क्‍योंकि हॉटस्‍टार सिर्फ कंटेंट के लिए ही नहीं है बल्कि उसमें टेक्‍नोलॉजी भी है। मेरा मानना है कि आने वाले दिनों में भारतीय मीडिया के सामने लीडरशिप और टैलेंट बड़ी चुनौती होंगी।  

न्‍यूज जर्नलिज्‍म की क्‍वॉलिटी (Quality of News Journalism)

रोजाना सुबह तकरीबन एक घंटा मैं भारतीय और विदेशी अखबार पढ़ता हूं। मुझे यह स्‍वीकार करने में कोई हर्ज नहीं है कि मैं कई न्‍यूज चैनल इसलिए नहीं देखता हूं कि वे वहीं घिसी-पिटी सामग्री अथवा शोरगुल दिखाते हैं और उनमें डाइरेक्‍शन की काफी कमी है। भारतीय मीडिया संस्‍थानों के मालिकों और एडिटर्स को यह चीज समझनी होगी। न्‍यूज का बिजनेस मॉडल ठप हो चुका है। कई बड़े मीडिया संस्‍थानों का जोर इनवेस्‍टमेंट पर है और वे मुद्रीकरण को लेकर कई तरह के समझौते कर रहे हैं। आजकल लोग सामान की तरह न्‍यूज को खरीद और बेच रहे हैं। इससे न्‍यूज की पवित्रता और विश्‍वसनीयता प्रभावित हो रही है। न्‍यूज ऑर्गनाइजेशंस और कंज्‍यूर्स, व्‍यूअर्स व रीडर्स के बीच लगातार घट रहे विश्‍वास को लेकर मैं बहुत चिंतित हूं।

इंडिया ऐसे चुनिंदा देशों में शामिल है, जहां पर अलग-अलग व्‍यावसायिक हितों वाले लोग न्‍यूज ऑर्गनाइजेशंस को संभाल रहे हैं। ऐसी स्थिति में अपने अन्‍य हितों के लिए ये लोग न्‍यूज का इस्‍तेमाल करते हैं। यह बड़े दुख की बात है कि पारंपरिक मीडिया संस्‍थान भी पैसे कमाने के लिए सभी हथकंडे अपना रहे हैं। समाज, सरकार और मीडिया को इस स्थिति से निपटने के लिए मिलकर साथ आना होगा। समाचार का मूल्‍य और महत्‍व तभी तक है, जब तक इसकी विश्‍वसनीयता होती है।

तटस्‍थता काफी अच्‍छी बात है लेकिन यह एक आदर्श इच्‍छा भी होनी चाहिए। आपके अपने विचार हो सकते हैं लेकिन जरूरी नहीं हैं कि दूसरे व्‍यक्ति के विचार भी वही हों अथवा आप उनसे सहमत हों। आपको दोनों पक्षों की विचारों पर ध्‍यान देना होगा। आजकल, न्‍यूज का इस्‍तेमाल व्यापार, राजनीतिक या कुछ गैर-पत्रकारिता एजेंडा को चलाने के लिए किया जा रहा है, यह स्थिति काफी खतरनाक है। एक युवा पत्रकार के रूप में मेरे एडिटर ने मुझे बताया था कि संपादकों को देखा अथवा सुना नहीं जाना चाहिए, उन्‍हें सिर्फ कभी-कभी पढ़ना चाहिए।

आजकल तो प्रिंट के एडिटर्स भी न्‍यूज चैनल्‍स पर दिखाई दे रहे हैं। हर कोई अपनी प्रोफाइल बनाने में जुटा हुआ है। इन चैनलों के मालिक खुद जाकर राजनेताओं और व्‍यावसायिक लोगों से मिलते हैं। ऐसे में मूल्‍यों और व्‍यावसायिक सिद्धांतों का ह्रास हो रहा है।

एडिटर्स और न्‍यूजरूम्‍स को रिपोर्टर्स और एंकर्स को इस बारे में बताना होगा। सभी के लिए आचार संहिता बनाने के लिए उन्‍हें अलग करने की जरूरत है। यदि एंकर्स और एडिटर्स राजनीतिक दलों के अनुसार काम करेंगे तो जिस उद्देश्‍य के लिए वे इस फील्‍ड में आए हैं, उसे पाना मुश्किल है। जिन बड़े संपादकों से मैं मिला हूं अथवा जिन मीडिया प्रतिष्ठानों के मालिकों के साथ मुझे काम करने का मौका मिला है, वे कभी इस तरह किसी से मिलने नहीं गए। एक एडिटर के रूप में मैं भी शायद ही इस तरह किसी से मिला हूं। हां, मेरे रिपोर्टर्स उनसे मुलाकात करते हैं और न्‍यूजरूम में डेस्‍क के लोग रिपोर्टर के इनपुट पर सवाल करते हैं क्‍योंकि पत्रकार कई बार जोखिम भरा काम करते हैं।

सामाजिक बदलाव के रूप में मीडिया संस्‍थान (Media Organizations as Agents of Social Change)

जेएनयू से पढ़ाई करने के बाद जब मैं पत्रकारिता को अपना कॅरियर बना रहा था तो मैं अपने एक सीनियर से मिला था जो पेशे से पत्रकार थे। उन्‍होंने कहा था, ‘यदि आप मीडिया में आना चाहते हो तो आपको कुछ बातों के बारे में जानने और सोचने की जरूरत है। आपको आर्थिक तंगी का जीवन जीने के लिए तैयार रहना होगा। आप अपनी कार नहीं खरीद सकते हैं और हो सकता है कि आप कभी भी मकान नहीं खरीद पाओ।मैंने कहा, ‘क्‍या सच में ऐसा है तो कोई क्‍यों पत्रकार बनना चाहेगा?’ तब उन्‍होंने कहा, ‘क्‍योंकि आप यहां पर दूसरे लोगों के लिए अच्‍छा काम करने में सक्षम होगे और तब मुझे यह बात समझ में आई। कहने का मतलब यह था कि आप कुछ भी करते हो, फिर चाहे वह फिल्‍म हों अथवा धारावाहिक, वे सब समाज पर प्रभाव डालते हैं और वे मीडिया का केंद्र हैं। यदि आप उनके बारे में नहीं सोच रहे हैं तो आप अपना समय बर्बाद कर रहे हैं और मीडिया को नष्‍ट कर रहे हैं। पत्रकारों को ‘pompous’ कहा जाता था क्‍योंकि वे कहते थे कि हमें ये करना है और वो करना है लेकिन मेरा मानना है कि यह एक अच्‍छी चीज है क्‍योंकि लोग उन्‍हें ज्‍यादा मानते थे। लोगों का मानना था कि वे समाज की बेहतरी और लोगों की जिंदगी बदलने में बड़ी भूमिका निभा रहे थे। आज कई एडिटर्स और कुछ मीडिया प्रतिष्‍ठान मालिक इस बारे में ज्‍यादा नहीं सोच रहे हैं और वे सिर्फ पैसा कमाने में लगे हुए हैं। 

स्‍टारकी बात करें तो हमें यकीन है कि कंटेंट को छोड़कर इस तरह की चीजों के पीछे नहीं भागेंगे। हम कोई भी ऐसा काम नहीं करेंगे जिससे हमें रेटिंग तो मिल जाए लेकिन वह सोसायटी के लिए अच्‍छी न हो। सत्‍यमेव जयतेके बारे में बहुत बातें होती हैं लेकिन हमारे हर ड्रामे में हमेशा पॉजीटिव स्‍टोरी लाइन होती है। अपने चैनल पर हम लोगों की अच्‍छी जिंदगी और बेहतर कल के बारे में बात करते हैं। जब हम स्‍पोर्ट्स में आए थे तब हमने काफी लोगों से बातचीत की और यहां वहां गए। अब हम कई खेलों में शामिल हैं और टेबल टेनिस लीग की शुरुआत करने जा रहे हैं। हमने स्‍पोर्ट्स पर बहुत पैसा खर्च किया है लेकिन कभी इससे पैसा नहीं कमाया और इसलिए ऐसा किया क्‍योंकि यह सोसायटी के लिए अच्‍छा है। हमने लोगों की जिंदगी बदल दी है और यही कारण है कि कबड्डी और फुटबॉल से हमें काफी खुशी और फख्र होता है।   

आज प्रो कबड्डी लीग का प्‍लेयर एक सेलिब्रिटी है और अच्‍छी कमाई करता है। यही मीडिया की शक्ति है। यहां तक कि सिंगिंग और डान्सिंग रियलिटी शो के द्वारा भी हम लोगों को उनकी प्रतिभा दिखाने का मौका देते हैं।  मीडिया का मतलब आज सिर्फ न्‍यूज, ऐंटरटेनमेंट और मूवीज ही नहीं है, बल्कि लोगों की जिंदगी पर पड़ने वाल प्रभाव है और स्‍टारइसी में विश्‍वास रखता है।

 

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