‘एस्‍सेल ग्रुप’ के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा ने बताया सफलता का ये मूलमंत्र

‘एस्‍सेल ग्रुप’ के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा ने बताया सफलता का ये मूलमंत्र

Wednesday, 17 May, 2017

रुहैल अमीन ।।

एस्‍सेल ग्रुप’ (Essel Group) के चेयरमैन और राज्‍यसभा सदस्‍य डॉ. सुभाष चंद्रा हमेशा दूर की सोचते हैं। चाहे इतना बड़ा बिजनेस साम्राज्‍य हो अथवा उनकी राजनीतिक पारी, डॉ. चंद्रा हमेशा नई-नई चीजें करने में विश्‍वास रखते हैं। एस्‍सेल ग्रुप इस समय अपने 90 वर्ष पूरे होने का जश्‍न मना रहा है। वूमैन इकनॉमिक फोरम 2017’ (Women Economic Forum 2017)  में एक्‍सचेंज4मीडिया (exchange4media) के एडिटर-इन-चीफ अनुराग बत्रा के साथ एक विशेष बातचीत में डॉ. चंद्रा ने अपनी सफलता के राज बताए।

एस्‍सेल ग्रुप इस समय मीडिया ही नहीं बल्कि कई तरह के बिजनेस जैसे इंफ्रॉस्‍ट्रक्‍चर, एजुकेशन, ऐंटरटेनमेंट, टेक्‍नोलॉजी में अपनी सफलता के झंडे गाड़ रहा है। बिजनेस को इस बुलंदियों तक पहुंचाने के बारे में डॉ. चंद्रा ने बताया, ‘हमने हाल ही में अपने बिजनेस के 90 साल पूरे किए हैं। हमने अपनी शुरुआत कृषि के औजारों की ट्रेडिंग से शुरू की थी लेकिन जब हम लोगों ने बिजनेस संभाला तो इसमें कुछ भी तरक्‍की नहीं हो रही थी। इसलिए हमने नए सिरे से बिजनेस करना शुरू कर दिया और आज हम एक लाख करोड़ से ज्‍यादा बड़ा ग्रुप बन चुके हैं।

एस्‍सेल ग्रुप की कामयाबी डॉ. चंद्रा के व्‍यापारिक कौशल का ही प्रमाण है, जो जोखिम उठाने से नहीं डरते और उसे पहले ही भांप लेते हैं। इसके अलावा वह अपने मूल्‍यों से कोई समझौता नहीं करते। इस बारे में मीडिया मुगल रूपर्ट मर्डोक से हुई बिजनेस डील का उदाहरण देते हुए डॉ. चंद्रा ने बताया, ‘जब मैंने 1993-94 में रूपर्ट मर्डोक के साथ पार्टनरशिप की थी तब लोगों ने कहा था कि मैं गलत निर्णय ले रहा हूं। सीमित पूंजी होने के कारण उस समय मेरे पास ज्‍यादा विकल्‍प नहीं थे। सब जानते हैं कि मर्डोक की पॉलिसी सबसे पहले मार्केट पर कब्‍जा करने की रही है। जब दोनों पार्टनर बने तब मैनेजमेंट हमारे साथ था। हालांकि मर्डोक पार्टनरशिप पर पूरी तरह अपना नियंत्रण चाहते थे और वह चाहते थे कि मैं अपने शेयर बेच दूं। लेकिन मैं अपने मूल्‍यों के प्रति ईमानदार रहा और उनके तीन बिलियन डॉलर के प्रस्‍ताव को ठुकरा दिया, जो उस समय बहुत बड़ी रकम हुआ करती थी। मेरा जवाब बिल्‍कुल स्‍पष्‍ट था कि हमारा देश बिकाऊ नहीं है। मैं हमेशा अपने इन्‍ही सिद्धांतों पर चला और इसने मुझे बिजनेस में हमेशा मदद की। मेरा मानना रहा है कि हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहिए, फिर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि फायदा हो रहा है अथवा नहीं। ’ 

यही नहीं, डॉ. चंद्रा शायद ऐसे पहले भारतीय थे जिन्‍होंने अपने शो के फॉर्मेट की चोरी का आरोप लगाते हुए पश्चिमी के कुछ मीडिया घरानों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। भारतीय टैलेंट पर भरोसा जताने वाले डॉ. चंद्रा ने बताया, ‘मैं उस समय एमी अवॉर्ड्स समारोह (Emmy Awards ceremony) में भाग लेने के लिए न्‍यूयॉर्क गया हुआ था। वहां कुछ लोगों का कहना था कि भारतीय हमेशा उनके कंटेंट को कॉपी करते हैं। मैं उनकी बातों से सहमत नहीं हुआ और उन्‍हें बताया कि वास्‍तव में उन्‍होंने मेरे शो सारेगामापा (Sa Re Ga Ma Pa) को कॉपी किया था। जब मैंने उन्‍हें कार्यक्रम के निर्माता को भेजे गए कानूनी नोटिस के बारे में बताया तो वे काफी हंसे थे। हालांकि कुछ मित्रों के दबाव में हम इस केस को ज्‍यादा आगे नहीं ले जा सके।

डॉ. चंद्रा का कहना था, ‘आपको यह जानकर काफी आश्‍चर्य होगा कि हमारे देश में अभी भी 75 प्रतिशत बिजनेस बिना किसी कागजात के किया जाता है। हमारे यहां सिर्फ हाथ मिलाकर बिजनेस डील पक्‍की हो जाती है और इससे हमारे कल्‍चर के बारे में पता चलता है कि हम किस तरह से बिजनेस करते हैं।एस्‍सेल ग्रुप के 90 साल के सफर के बारे में उन्‍होंने कहा कि इस दौरान हमने इतिहास रचने का काम किया है, कई नए क्षेत्रों में प्रवेश किया है।

डॉ. चंद्रा का कहना था कि सफलता के लिए हमेशा नई-नई चीजें सीखते रहना चाहिए। आने वाले समय के बारे में मुझे पूरा विश्‍वास है कि हम अपने जुनून और समर्पण से ग्रुप को और आगे ले जाएंगे।  

अपनी सफलता के बारे में डॉ. चंद्रा ने बताया, ‘जहां तक मैंने अपने अनुभवों से सीखा है कि सफलता का सबसे महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा आत्‍मविश्‍वास है। सबसे पहले आपको अपने ऊपर भरोसा जताना होगा और मैं गारंटी लेता हूं कि कोई भी शक्ति आपको अपना लक्ष्‍य प्राप्‍त करने से नहीं रोक सकती है।


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