अब इस अखबार ने शुरू किया ‘डिजिटल सबस्क्रिप्शन’, दिए ये चार ऑप्शंस...

अब इस अखबार ने शुरू किया ‘डिजिटल सबस्क्रिप्शन’, दिए ये चार ऑप्शंस...

Monday, 09 October, 2017

 समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।


इन दिनों इंटरनेट का इस्‍तेमाल तेजी से बढ़ता जा रहा है। ऑनलाइन के जमाने में तमाम तरह का कंटेंट इंटरनेट पर आसानी से उपलब्‍ध है। इस पर लागत तो कम आती है ही, लोगों को तेजी से न्‍यूज अपडेट हासिल करने में भी सुविधा होती है। ऐसे में प्रिंट इंडस्‍ट्री को तमाम चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एक तो पहले ही प्रिंट मीडिया अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए जूझ रहा था, ऊपर से इंटरनेट की सुनामी ने रही-सही कसर और पूरी कर दी है।


ऐसे में लगभग सभी समाचार पत्र-पत्रिकाएं भी समय की नजाकत को पहचानते हुए अपनी ऑनलाइन मौजूदगी को और मजबूत करने में जुटे हुए हैं ताकि इंटरनेट पर एक-दूसरे को कड़ी टक्‍कर दी जा सके।


इसी कड़ी में ‘द हिन्‍दू’ (The Hindu) ग्रुप के बिजनेस अखबार ‘बिजनेस लाइन’ (Business Line) ने प्रतिस्‍पर्द्धा में बने रहने के लिए हाल ही में शुरू किए अपने ई-पेपर (फिलहाल सिर्फ चेन्‍नई एडिशन में) को और अधिक आसान फॉर्मेट में पेश किया है। इस फॉर्मेट में कुछ नए फीचर्स भी शामिल किए गए हैं। इन फीचर्स का इस्‍तेमाल कर आप इमेज से टेक्‍स्‍ट फॉर्मेट में और इसी तरह से टेक्‍स्‍ट से इमेज फॉर्मेट में जा सकते हैं। सोशल मीडिया पर आर्टिकल शेयर करने के साथ ही आप उन्‍हें अपनी फेवरेट लिस्‍ट में सेव भी कर सकते हैं। इसके अलावा आप इनके एचटीएमएल अथवा पीडीएफ वर्जन को भी डाउनलोड भी कर सकते हैं।


इन सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए पाठकों को सबस्क्रिप्‍शन चार्ज के रूप में कुछ भुगतान भी करना होगा। हालांकि पाठकों की सुविधा को देखते हुए अखबार ने सात दिन के फ्री ट्रायल के अलावा सबस्क्रिप्‍शन के चार विकल्‍प दिए हैं।


उल्‍लेखनीय है कि वर्ष 2016 में एक और प्रमुख बिजनेस अखबार ‘बिजनेस स्‍टैंडर्ड’ (Business Standard) ने देश में डिजिटल सबस्क्रिप्‍शन की शुरुआत की थी। इसके लगभग एक साल बाद ‘बिजनेस लाइन’ ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ाया है। हालांकि दोनों अखबारों में फीचर्स लगभग एक जैसे हैं, लेकिन ‘बिजनेस स्‍टैंडर्ड’ का वार्षिक सबस्क्रिप्‍शन चार्ज ‘बिजनेस लाइन’ के चार्ज से दोगुने से भी ज्‍यादा है। यही नहीं, ‘बिजनेस लाइन’ में ई-पेपर को वर्तमान तारीख से पिछले दो महीने तक के इश्‍यू को देखने की सुविधा भी है। सबस्‍क्राइबर इसके पीडीएफ फॉर्मेट को डाउनलोड भी कर सकता हैं।



हालांकि, अन्‍य प्रमुख बिजनेस अखबार जैसे- ‘मिंट’ (Mint), ‘फाइनेंसियल एक्‍सप्रेस’ (Financial Express) और ‘द इकनॉमिक टाइम्‍स’ (Economic Times) की बात करें तो ये कंटेंट एक्‍सेस करने के लिए पाठकों से एक रुपया नहीं लेते हैं। यदि ‘फाइनेंसियल एक्‍सप्रेस’ की बात करें तो इसके विजिटर पिछले पांच साल के ई-पेपर को एक्‍सेस कर सकते हैं, ‘मिंट’ के पिछले तीन महीने के ई-पेपर जबकि ‘इकनॉमिट टाइम्‍स’ के सिर्फ पिछले छह दिन के ई-पेपर को एक्‍सेस किया जा सकता है।


ऐसे में यह सबसे बड़ा सवाल है कि एक तरह जहां इंटरनेट पर पाठक हजारों राष्‍ट्रीय-अंतरराष्‍ट्रीय अखबारों को आसानी से पढ़ सकता है और हजारों ब्‍लॉग व वेबसाइट भी मौजूद हैं, जहां से आसानी से पाठकों की कंटेंट की जरूरतें पूरी हो सकती हैं तो फिर किसी अखबार का सबस्क्रिप्‍शन मॉडल, खासकर न्‍यूज की बात करें तो कितना प्रभावी होगा?


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