‘रीडरशिप बढ़ाने के लिए प्रिंट मीडिया को करना होगा यह काम’

‘रीडरशिप बढ़ाने के लिए प्रिंट मीडिया को करना होगा यह काम’

Friday, 25 August, 2017

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 

‘टाइम्स  ऑफ इंडिया’ और ‘मिरर’ के डायरेक्ट र (ब्रैंड) संजीव भार्गव अधिक से अधिक पाठकों को जोड़ने के अपने मिशन में जुटे हुए हैं। उनका मानना है कि ब्रैंड को युवाओं पर केंद्रित कार्यक्रमों के जरिये उन्हें  लगातार सशक्त‍ बनाते रहना चाहिए।

अपने तीन दशक के कॅरियर में संजीव भार्गव विभिन्नओ विज्ञापन एजेसिंयों के साथ काम कर चुके हैं लेकिन मार्केटिंग में यह उनकी पहली भूमिका है। हालांकि इंडस्ट्री  से जुड़े लोगों का कहना है कि संजीव हमेशा से दिलों में उतरने वाले मार्केट विशेषज्ञ रहे हैं जो एजेंसी के दिनों से ही विभिन्नो ब्रैंड्स को मार्केटिंग के सॉल्यू शंस देने के लिए तैयार रहते हैं।  

क्रिस्टीवना मोनिज (CHRISTINA MONIZ) के साथ बातचीत में संजीव भार्गव ने अपनी नई भूमिका से लेकर विभिन्नन मुद्दों पर अपना पक्ष रखा। प्रस्तुीत हैं बातचीत के प्रमुख अंश: 

‘JWT’ में क्रिएटिव पार्टनर की नियुक्ति के पीछे क्याम स्ट्रे टजी थी। खासकर तब, जब एजेंसी पहले ही ब्रैंड के लिए अवॉर्ड विनिंग कल्टर ऐडवर्टाइजिंग कैंपेन तैयार कर चुकी थी?

पांच साल पहले इंडस्ट्रीा विकास के एक अलग चरण में थी। आज प्रिंट मीडियम को अपनी प्रासंगिकता फिर से स्थापित करनी है और नए लोगों को भी यह समझाना है कि अखबार पढ़ना क्योंम जरूरी है। कम्युतनिकेशन की यह जरूरत पहले नहीं थी और इसके लिए ही कुछ खास स्ट्रे टजी बनाने की जरूरत थी। मेरे हिसाब से इस काम के लिए जे वाल्टलर थॉमसन (J. Walter Thompson) को कुछ योजनाकारों की जरूरत थी। ‘टाइम्स  ऑफ इंडिया’ हमेशा से बेहतरीन कम्युीनिकेशन के लिए जाना जाता है। मेरा मानना है कि कई बार जिन विषयों के साथ हम डील करते हैं, वह इतने महत्वीपूर्ण होते हैं कि कम्युानिकेशन को थोड़ा सा अनुचित लाभ मिल जाता है। फिर भी, नई एजेंसी के साथ मैं कुछ बेहतरीन कार्य करने की उम्मीमद कर रहा हूं।       

अगले पांच वर्षों में आप टाइम्से ऑफ इंडिया ब्रैंड के प्रदर्शन को किस रूप में देखते हैं। खासकर डिजिटल भी अपनी जमीन तैयार कर रहा है?

पहली बात तो यह है कि मैं इसे ‘zero sum game’ के रूप में नहीं देखता हूं, जहां पर किसी के नुकसान का फायदा दूसरे को होता है। इंटरनेट अपनी पसंद का विषय है। इसका मतलब है कि आप जो पढ़ना चाहते हैं वह पढ़ेंगे। लेकिन यदि आप रोजाना व्याटपक समाचार चाहते हैं तो सिर्फ अखबार ही वह दे सकता है। इस प्रकार यह हर माध्य म में आगे है। इसके अलावा प्रॉडक्‍ट भी महत्व पूर्ण भूमिका निभाते हैं। दूसरे प्रतिद्वंद्वी अखबारों की तुलना में हम क्याद कर रहे हैं, यह जानने के लिए हमारे पास कई कंट्रोल और मीजरमेंट हैं। किसी भी अन्यर अखबार के मुकाबले ‘टाइम्सह ऑफ इंडिया’ में हर पेज पर ज्याोदा खबरें होती हैं। हम यह मानकर चलते हैं कि लोगों के पास पढ़ने के लिए मुश्किल से ही पर्याप्तड समय होता है। इसलिए हम चीजों को इस तरह पैकेज करते हैं ताकि वे तेजी से पढ़ सकें। इसके लिए इंफोग्राफ, पिक्च र्स और स्टोचरी की लंबाई का भी ध्याान रखा जाता है। यही सब बातें हैं, जिनके द्वारा हम एक बेहतरीन प्रॉडक्टा तैयार करते हैं।     

आज के गतिशील और तेजी से बदलते मार्केट में आप कैसे ब्रैंड के टार्गेट ऑडियंस का चुनाव करते हैं?

सीधी सी बात है कि हम युवाओं को केंद्रित रखते हैं। हम एक युवा देश हैं और यदि मैं देश के युवाओं को अखबार पढ़ने के लिए प्रेरित नहीं करता हूं तो ये मानकर चलिए कि मैं अपना काम नहीं कर रहा हूं, क्योंेकि मेरा काम ही युवाओं को अखबार पढ़ने के लिए प्रेरित करना है।  

ओप्पों टाइम्स  फ्रेश फेस प्रॉपर्टी किस तरह ‘टाइम्सन ऑफ इंडिया’ पर प्रभाव डालता है?

‘टाइम्सअ ऑफ इंडिया’ को एक ब्रैंड के रूप में न सिर्फ अपने पाठकों से जुड़ने की जरूरत है बल्कि इसे सशक्तीयकरण का माहौल बनाने की भी जरूरत है। ‘टाइम्सब ऑफ इंडिया’ की पहल ‘लीड इंडिया’ और ‘टेक इंडिया’ की तरह ओप्पो  टाइम्सौ फ्रेश फेस भी युवाओं को सशक्तइ बनाने को लेकर है। इसके द्वारा हम युवाओं और किशोरों से बातचीत कर रहे हैं और उनके अंदर आत्मीविश्वाकस पैदा करने के लिए उन्हेंे एक प्लेओटफार्म दे रहे हैं।     

‘टाइम्स  ऑफ इंडिया’ और ‘मिरर’ ब्रैंड्स के लिए फिलहाल आपकी प्राथमिकता सूची में क्या  शामिल है?

हमें इंग्लिश रीडरशिप बढ़ाने की जरूरत है और मेरे लिए यह एक मिशन है। यह सिर्फ मार्केटिंग प्लाआन नहीं है। हमारे देश की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत यह भी है कि हमारे यहां अंग्रेजी बोलने वालों की बड़ी संख्याक है। हमें इंग्लिश रीडरशिप को काफी बढ़ावा देने की जरूरत है। इसके अलावा हमारे यहां युवाओं की संख्या् भी काफी अधिक है और उन्हेंी भी अखबार का मूल्यी समझने की जरूरत है। हालांकि उनके लिए इंटरनेट काफी सुगम है ऐसे में उनके अंदर रोजाना अखबार पढ़ने की आदत डालना हमारे लिए काफी महत्वूपूर्ण है।     ‍

यदि प्रोफेशनल दृष्टिकोण से देखें तो ऐडवर्टाइजमेंट की दुनिया के बाहर यह आपका पहला कदम है। दोनों में क्यान भिन्न्ता है और वहां की कौन सी सीख आप यहां अमल में लाएंगे? 

मैंने हमेशा से खुद को एक मार्केटर के रूप में माना है। जब मैं ‘J. Walter Thompson’ और ‘FCB Ulka’ के साथ काम करता था, तब भी मेरा यही मानना था। इसके अलावा मैंने हमेशा अपने सभी क्लाऔइंट्स को मार्केटिंग सॉल्यूिशंस दिए हैं। ‘टाइम्सए ऑफ इंडिया’ के साथ खास बात यह है कि यह समय व परिस्थितियों के अनुसार परिवर्तनशील है। आप इस प्रॉडक्ट  में जरूरत के अनुसार बदलाव कर सकते हैं और यह मार्केटिंग स्ट्रे टजी का एक महत्ववपूर्ण हिस्साू है। इसमें कई सारे एलीमेंट्स मिलकर काम करते हैं और सभी काफी पॉवरफुल हैं। इसलिए मेरे हिसाब से यह सबसे अच्छास मार्केटिंग जॉब है।


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