बड़ी वजह के लिए इस मीडिया संस्थान ने शशि थरूर से मिलाया हाथ...

बड़ी वजह के लिए इस मीडिया संस्थान ने शशि थरूर से मिलाया हाथ...

Tuesday, 02 January, 2018

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

आज के समय में कई लोग ‘स्‍टॉकिंग’ से परेशान हैं लेकिन किसी न किसी कारण से वे अपनी आवाज नहीं उठा पाते हैं। ऐसे ही लोगों को आवाज देने के लिए ‘द क्विंट’ (The Quint) ने एक अभियान Talking Stalking’ चलाया हुआ है।

इस अभियान को लोगों की जबर्दस्‍त प्रतिक्रिया मिली है। इसको देखते हुए स्‍टॉकिंग को कानून के दायरे में लाने की पहल शुरू हुई हैताकि इस तरह के मामलों को गंभीरता से लिया जा सके। अभियान के दौरान मिले आंकड़ों का अध्‍ययन करने से ये भी पता चला कि यदि स्‍टॉकिंग को गैरजमानती अपराध घोषित कर दिया तो ऐसे मामलों में कमी आ सकती है।

इसी बात को ध्‍यान में रखते हुए ‘ द क्विंट’ ने सांसद शशि थरूर और वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता कामिनी जायसवाल के साथ पार्टनरशिप कर देश के आपराधिक कानून में संशोधन करने का प्रस्ताव रखा है। ताकि इसे एक प्राइवेट बिल की तरह पेश किया जा सके और पास करवाया जा सके।

इस प्रस्‍तावित बिल के समर्थन में ‘द क्विंट’ ने 20 दिसंबर 2017 को नई दिल्‍ली के ऑक्‍सफोर्ड बुकस्‍टोर पर एक कार्यक्रम का आयोजन भी किया था। इसके तहत पैनल चर्चा का आयोजन भी किया गयाजिसे ‘फेसबुक लाइव’ पर प्रसारित भी किया गया था।  

इस बारे में शशि थरूर का कहना है, ‘अब समय आ गया है जब हम स्‍टॉकिंग के बारे में बात करें। भारत में जमानती अपराध होने के चलते स्‍टॉकिंग करने वालों को डर नहीं रहता है। मैंने कानून में संशोधन के लिए इस बिल को पेश किया थामेनका गांधी को इस मामले को निजी तौर पर उठाना चाहिएइससे इस बिल को संसद में पास होने में मदद मिलेगी। जो लोग इस बिल को पास होने नहीं दे रहे हैं वे वर्णिका कुंडू और लक्ष्‍मी जैसी लड़कियों का अपमान कर रहे हैंजो स्‍टॉकिंग व छेड़छाड़ की शिकार हो चुकी हैं।

सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्‍ता करुणा नंदी का इस बारे में कहना है कि हमारे देश में स्‍टॉकिंग को जमानती अपराध घोषित किया गया हैयह हमारी कानून व्‍यवस्‍था में भारी कमी है। उनका कहना है कि वर्ष 2013 में जब यह मुद्दा उठा था तभी स्‍टॉकिंग को गैरजमानती अपराध घोषित कर दिया जाना चाहिए थालेकिन पार्लियामेंट के कारण ऐसा नहीं हो सका। इस कारण कई महिलाएं इसकी शिकार हुईं। आखिर में नंदी ने कहा कि महिलाएं भी भारतीय अधिकार हैं और उन्‍हें पीछा किए जाने से मुक्ति का अधिकार है।     

चंडीगढ़ में पीछा किए जाने व छेड़छाड़ की शिकार हुईं वर्णिका कुंडू का कहना है, ‘कुछ लोगों द्वारा स्‍टॉकिंग के कारण हमें क्‍यों अपनी आजादी गंवानी चाहिए।

वर्णिका कुंडू छेड़छाड़ मामले की वजह से ही यह बिल सामने आया और अब वर्णिका ‘द क्विंट’ के साथ मिलकर इस बिल के समर्थन में हस्‍ताक्षर अभियान चला रही हैं। अब तक करीब 130000 हस्‍ताक्षर हो चुके हैं।

वहींतेजाब हमले का शिकार हो चुकी लक्ष्‍मी ने भी समाज से इस परेशानी के प्रति अपना नजरिया बदलने की गुजारिश की है। लक्ष्‍मी का कहना है, ‘मैं हताशा में नहीं जी सकतीमैं पीडि़त हूं न कि बेचारी। मुझे भी अपनी जिंदगी जीने का पूरा अधिकार है। मैंने अपनी जगह खुद बनाई है। सबसे पहली बात यह है कि आप खुद को सपोर्ट करोतभी अन्‍य लोग भी आपको सपोर्ट करेंगे। इसमें शर्मिंदा नहीं होना चाहिए। जिस आदमी ने मुझ पर तेजाब डाला और जिन लोगों ने उसे सपोर्ट कियाशर्म उन्‍हें आनी चाहिए।

स्‍टॉकिंग से जूझ रहीं महिलाओं के अधिकारों के लिए काम रही संस्‍था ‘Jagori’ की डायरेक्‍टर गीता नंबीशन भी क्विंट के ‘#TalkingStalking’ कैंपेन से पार्टनरशिप करने को तैयार हैं। गीता का कहना है कि जब लोगों को ये बात समझ में आ जाएगी कि स्‍टॉकिंग पर कड़ी सजा मिलेगी तो इस तरह के अपराधों में कमी आएगी। 

 

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