Times Now का ये दावा हुआ गलत साबित...

Saturday, 09 September, 2017

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

एडवर्टाइजिंग स्‍टैंडडर्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) की कंज्‍यूमर कंप्‍लेंट्स काउंसिल (CCC) को जून 2017 में 126 विज्ञापनों की शिकायतें प्राप्‍त हुईं। इनमें से 62 शिकायतों को सही ठहराते हुए जांच के लिए उन्‍हें रोका गया था। जिन 62 शिकायतों को जांच के लिए रोका गया, उनमें 23 हेल्‍थकेयर कैटेगेरी, 17 एजुकेशन कैटेगरी, 10 फूड और बेवरेज कैटेगरी की जबकि छह पर्सनल केयर कैटेगरी और छह अन्‍य कैटेगरी के विज्ञापनों की थी।

सीधी शिकायतें

एएससीआई ने जिन शिकायतों पर कार्रवाई की, वे उसे आमलोगों और इंडस्‍ट्री के साथ ही डिपार्टमेंट ऑफ कंज्‍यूमर अफेयर्स के भ्रामक विज्ञापनों की शिकायत के लिए बनाए गए पोर्टल ‘Grievances Against Misleading Advertisements (GAMA)’ पर भी मिली थीं। यहां मिलीं 99 शिकायतों में से 38 को जांच के लिए रोका गया।

हेल्‍थकेयर इस कैटेगरी में जिन कंपनियों की विज्ञापनों को जांच के लिए रोका गया, उनमें स्लिमिंग’, ‘स्किन एंड क्लिनिक’, डॉ. ऑर्थो कैप्‍सूल और ऑइन्‍टमेंट आदि शामिल रहे।

फूड एंड वेबरेज ‘Pepsi Gatecrash’ के विज्ञापन को इसलिए रोका गया क्‍योंकि इसमें दिखाई जाने वाली डिस्‍क्‍लेमर (disclaimers) का फॉन्‍ट साइज बहुत छोटा था और वह पढ़ने में नहीं आ रहा था। इससे यह स्‍पष्‍ट था कि इसने ASCI की उन गाइडलांस का उल्‍लंघन किया है, जिसमें इस चेतावनी के लिए ज्‍यादा छोटे फॉन्‍ट का इस्‍तेमाल नहीं किया जा सकता है। वहीं, ‘रसनाका विज्ञापन भी जांच में अपने दावे में सही नहीं निकला। इसके अलावा जांच में यह भी पाया गया कि कोका कोला इंडिया प्राइवेट लिमिटेडके सॉफ्ट ड्रिंक माजा’, ‘फैन्‍टा’, ‘स्‍प्राइटऔर थम्‍सअपके विज्ञापन भी एएससीआई की गाइडलाइंस का पालन नहीं कर रहे हैं।

पर्सनल केयर - Lotus Herbals Limited Safe Sun UV Screen Matte Gel’ भी अपने दावे के पक्ष में कोई वैज्ञानिक सबूत पेश नहीं कर सका। इसके अलावा इमामी केश किंग आयुर्वेदिक तेलऔर केश किंग शैंपूको भी इसलिए रोका गया क्‍योंकि इनमें दावे भी जांच में प्रामाणिक नहीं निकले।

एजुकेशन - कंज्‍यूमर कंप्‍लेंट्स काउंसिलने पाया कि इस कैटेगरी में चार ऐडवर्टाइजर्स अपने दावे में सही नहीं निकले और इस प्रकार वे एएससीआई की गाइडलाइंस का उल्‍लंघन कर रहे थे। इनमें सत्‍यदेव इंस्‍टीट्यूट’, ‘विजन आईएएस क्‍लासरूम’, ‘क्रिस्‍टल इंस्‍टीट्यूटऔर एपिन टेक्‍नोलॉजी लैब’(ATL Foundation) शामिल थे।

अन्‍य वोल्‍टास ऑल स्‍टार इंवर्टर के विज्ञापन में दिखाई जाने वाली डिस्क्लेमर (disclaimer) काफी कम यानी 13 पिक्‍सल में थी। इससे यह पढ़ने में नहीं आ रही थी। इस प्रकार इसने एएससीआई की गाइडलाइंस का उल्‍लंघन किया। वहीं, ‘भारत पेट्रोलियम कॉर्पऔर हॉन्‍डा एक्टिवा 4जीके दावे भी जांच में अपने दावे की पुष्टि नहीं कर सके। 


इसके अलावा अंग्रेजी न्‍यूज चैनल टाइम्‍स नाउ’ (Times Now) का दावा भी जांच में झूठा निकला। इसमें उसने खुद को ‘The Ruling No. 1बताया है। हालांकि इसमें दिखाया गया ग्राफिकल रिप्रजेंटेशन बार्क के नियमों के तहत सही है और दिखाए गए आंकड़े तकनीकी रूप से ठीक हैं। लेकिन इससे संबंद्ध डाटा अपने आप में पूर्ण नहीं हैं और भ्रामक हैं। ऐसे में ये बार्क की गाइडलाइंस के अनुरूप नहीं हैं।   

स्‍वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई (SUO MOTO ACTION)

इन विज्ञापनों को एएससीआई की प्रिंट और टीवी मीडिया सर्विलॉन्‍स ने नेशनल ऐडवर्टाइजिंग मॉनीटरिंग सर्विसेज प्रोजेक्‍ट’ (NAMS) के द्वारा स्‍वत:संज्ञान लेकर जांच के लिए रोका। इसके त‍हत 27 विज्ञापनों में से 24 ऐसे मिले जो भ्रामक प्रचार कर रहे थे। इनमें 13 एजुकेशन कैटेगरी, नौ हेल्‍थकेयर कैटेगरी और दो पर्सनल केयर कैटेगरी के शामिल थे। हेल्‍थकेयर कैटेगरी में जिन कंपनियों के विज्ञापन एएससीआई की गाइडलाइंस का उल्‍लंघन करते मिले उनमेंSabka dentist, Rediscover Clinic, Sunflower Women’s Hospital, Thareja Home Nursing, Kangra Herb Health Centre, Dr Batra’s Positive Health Clinic और Apollo Heart Inst शामिल थे। इनमें से कुछ तो ड्रग्‍स एंड मैजिक रेमेडीज एक्‍ट (DMR Act) का भी उल्‍लंघन कर रहे थे।

वहीं, एजुकेशन के क्षेत्र में Ambition School of Competitive Education, Timespro,  IITPT, Mukils Englio, Sure Centre Success, Deeksha Classes और  Sri Hari Academy Gate के विज्ञापन जांच में भ्रामक और एएससीआई की गाइडलाइंस का उल्‍लंघन करते हुए मिले।

जितने भी शैक्षिक संस्‍थानों के खिलाफ मिलीं शिकायतें जांच के लिए रोकी गईं, उनमें से अधिकांश ने 100 प्रतिशत जॉब प्‍लेसमेंट का दावा किया था और इसके साथ ही उन्‍होंने अपने क्षेत्र में नंबर वन होने क दाव किया था, जो जांच में प्रामाणिक नहीं निकला। इसके अलावा पर्सनल केयर कैटेगरी की बात करें तो ‘X Men Instant Fairness Face Cream’ और ‘Airiz Sanitary Napkin’ आदि के विज्ञापनों में किए गए दावे भी उनकी पुष्टि नहीं कर सके।

 

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