कुछ यूं मीडिया की स्वत्रंतता पर सरकार ने लगाया अंकुश, शुरू हुआ विरोध...

कुछ यूं मीडिया की स्वत्रंतता पर सरकार ने लगाया अंकुश, शुरू हुआ विरोध...

Friday, 05 January, 2018

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

उत्तराखंड में भाजपा सरकार ने एक तुगलकी फरमान जारी कर मीडिया की स्वत्रंतता पर अंकुश लगा दिया है, ताकि शासन यानी सचिवालय स्तर पर खबरों की खोज के दायरे को सीमित किया जा सके। राज्य के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने बीती 27 दिसंबर एक तीन पेज का आदेश जारी किया है, जिसके जरिए सरकारी दफ्तरों में मीडिया के प्रवेश पर पाबंदी लगाई दी गई है।

राज्‍य सरकार ने गोपनीय सूचनाओंके लीक होने की दलील देते हुए यह फैसला लिया है, जिसके मुताबिक किसी भी सरकारी विभागों के कार्यालयों/शाखाओं में मीडिया के प्रवेश पर सीधा प्रतिंबध रहेगा। सरकारी दफ्तरों में निजी काम से आने वाले किसी व्यक्ति को कार्यालय परिसर में अधिकारियों या स्टाफ के अन्य सदस्यों से मिलने की इजाजत भी नहीं होगी और यदि जरूरी है तो अफसर कार्यालय के रिसेप्‍शन पर आकर खुद ही आने वाले व्यक्ति या मीडियाकर्मियों से मुलाकात कर लेंगे।

मुख्‍य सचिव की ओर से जारी तीन पृष्‍ठों का इस आदेश की प्रति राज्‍य के सभी विभागों के अपर, प्रमुख और अन्‍य सचिवों को भेजी गई।

आदेश में खासतौर पर कैबिनेट बैठक का एजेंडा सार्वजनिक होने का हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया है, ‘कैबिनेट से जुड़े मुद्दों/प्रस्‍तावों का बैठक से पहले ही प्रकाशन बहुत ही दुर्भाग्‍यपूर्ण और आपत्तिजनक है। इससे कैबिनेट द्वारा लिया जाने वाला फैसला प्रभावित होता है। मंत्रिमंडल ने भी इस पर खेद और आपत्ति जताई थी।आदेश में सूचनाएं लीक होने की स्थिति में उसकी जांच कराने के तौर-तरीकों का भी उल्‍लेख किया गया है। इसके मुताबिक, कैबिनेट से जुड़े प्रस्‍ताव के बैठक से पहले ही अखबारों या मीडिया में आने पर संबंधित विभाग के अपर या प्रमुख सचिव या फिर प्रभारी सूचनाएं लीक होने के कारणों की छानबीन करेंगे।

राज्‍य के मुख्‍य सचिव ने 16 अगस्‍त 2010 में जारी आदेश का भी हवाला दिया है। आईएएस अधिकारियों को भी कैबिनेट मीटिंग से जुड़े मुद्दों या एजेंडे को लेकर गोपनीयता बरतने को कहा गया है।

हालांकि सरकार के इस तुगलकी फरमान पर बखेड़ा खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने इस फैसले को प्रेस की आजादी पर कुठाराघात करार दिया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल ने कहा कि पारदर्शी और जीरो टॉलरेंस वाली सरकार आखिर मीडिया से क्या छुपाना चाहती है। इस आदेश को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।

मीडिया के तीखे विरोध के बाद शुक्रवार को मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने इस मामले पर प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर सफाई दी कि मीडिया में तथ्यात्मक सूचनाएं साझा हो सकें इसलिए यह व्यवस्था बनाई गई है। उन्होंने यह भी कहा कि अब शासन के एक अफसर की ड्यूटी रोजाना मीडिया ब्रीफिंग के लिए लगाई जाएगी, जो प्रतिदिन शाम को चार बजे महत्‍वपूर्ण सूचनाओं के बारे में जानकारी देंगे। खासकर सरकारी स्‍तर पर लिए जाने वाले फैसलों के बारे में मीडिया को जनकारी दी जाएगी।


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