दैनिक जागरण के ऑफिस पर हुआ हमला, उठाया था गांव का अहम मुद्दा... दैनिक जागरण के ऑफिस पर हुआ हमला, उठाया था गांव का अहम मुद्दा...

दैनिक जागरण के ऑफिस पर हुआ हमला, उठाया था गांव का अहम मुद्दा...

Thursday, 09 November, 2017

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

उत्तर प्रदेश की मौजूदा सरकार महिलाओं की सुरक्षा प्रदान करने को लेकर भले ही लाख दावे करे, लेकिन कई जगह ऐसी हैं, जहां स्थिति दावों के बिल्कुल विपरीत है। यूपी का शामली शहर इनमें से एक है। आलम ये है कि आसपास के गांवों से यहां पढ़ने आने वाली लड़कियों ने छेड़छाड़ से तंग आकर सिर उठाकर चलना छोड़ दिया है। यहां तक कि कई लोगों को पढ़ाई तक छोड़नी पड़ गई है।

जब इस समस्या को हिंदी अखबार दैनिक जागरण ने 26 अक्टूबर को प्रमुखता से फोटो के साथ अपने फ्रंट पेज पर छापा, तो अगले ही दिन शामली के गोहरनी गांव की सैकड़ो महिलाओं ने जागरण के कार्यालय पर हमला बोल दिया। महिलाओं ने अखबार के दफ्तर में तोड़फोड़ की और ब्यूरो प्रभारी लोकेश पंडित के साथ हाथापाई करते हुए उनके कपड़े फाड़ दिए। यहां तक कि गांव में अब मीडिया पर पाबंदी भी लगा दी गई। यह गांव शामली से महज 7 किमी दूर है।


हिंदी न्यूज पोर्टल नवजीवन की एक रिपोर्ट की मानें तो, आसपास के गांवों से शामली में पढ़ने आने वाली लड़कियां छेड़छाड़ से इतनी तंग आ चुकी हैं कि वे ट्रैक्टर पर बैठकर कानों में ऊंगली डालकर और सर झुकाकर स्कूल जाने को मजूबर हैं। यहां की दर्जनों लडकियां शामली में हिन्दू कन्या इंटर कॉलेज में पढ़ती हैं।

लड़कियों के इस स्कूल के आसपास लड़कों के भी कई स्कूल हैं। इनमें भी लड़के आसपास के गांवों से ही आते हैं। लड़कियां इकट्ठा होकर ट्रैक्टर से आती-जाती हैं। लड़के इन लड़कियों पर फब्तियां कसते हैं और अश्लील इशारे करते हैं। जब इसकी शिकायत बढ़ने लगी तो कुछ लोगों ने अपनी बेटियों का स्कूल जाना बंद करा दिया, पर कुछ ने एक दूसरा रास्ता खोज लिया। लड़कियों को कहा गया कि वे पूरे रास्ते सर नहीं उठाएंगी, किसी लड़के से बात नही करेंगी और उन्हें कोई प्रतिक्रिया नही देंगी। अगर कोई बात हुई तो उसकी शिकायत घर आकर करेंगी, लेकिन जब किसी लड़की ने छेड़छाड़ की शिकायत घर आकर की तो उसे भी स्कूल भेजने से रोक दिया गया। इसके बाद पढ़ने की इच्छा रखने वाली लड़कियों ने घर शिकायत करना छोड़ दिया।

26 अक्टूबर को जब दैनिक जागरण ने इस समस्या को तस्वीर के साथ पब्लिश किया, तो पुलिस ने ट्रैक्टर-ट्रॉली से छात्राओं को स्कूल भेजने पर रोक लगा दी। इसके बाद गोहरनी गांव में पंचायत हुई और अगले ही दिन अखबार के शामली स्थित दफ्तर पर सैकड़ों महिलाओं ने पेट्रोल बम और लाठी-डंडे से लैस होकर हमला कर दिया। एक नामजद और 40 अज्ञात महिलाओं के खिलाफ शामली कोतवाली में शिकायत दर्ज की गई। सूचना पर एसपी अजयपाल मौके पर पहुंचे। हमला करने वाली महिलाओं के खिलाफ केस दर्ज किया गया। केस दर्ज होने की खबर पाकर छात्राओं के परिजन ट्रैक्टर-ट्राली में भर कर सदर कोतवाली पहुंच गए और मुकदमा वापस लेने की मांग करते हुए हंगामा किया। इसके बाद, गोहरनी गांव में हुई पंचायत में मीडिया के प्रति रोष जताया गया। पंचायत ने तय किया कि पुलिस की रोक के बावजूद वे अपनी लड़कियों को ट्रैक्टर-ट्राली से ही स्कूल भेजेंगे। परिजनों का कहना है कि उन्होंने अपने बच्चों पर न पहले बंदिश लगाई, न अब लगाएंगे।

इसके बाद से गांव में लड़कियों की पढ़ाई को लेकर लगातार पंचायत हो रही है। लड़कियों को हिदायत दी गई है कि वे मीडिया के किसी आदमी से बातचीत नहीं करेंगी। गांव में मीडिया के प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई।

नवजीवन की रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय दबंग इस समस्या का समाधान करने की बजाय इस शर्मनाक घटनाक्रम को उजागर करने वाले पत्रकारों पर हमले करा रहे हैं। इस मामले को लेकर डर इतना ज्यादा है कि कोई सामाजिक महिला कार्यकर्ता इस पर अपनी जबान नहीं खोलती हैं।


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