बिना फैकल्टी के ही इस यूनिवर्सिटी ने शुरू किया पांच वर्षीय पत्रकारिता कोर्स

Wednesday, 27 September, 2017

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) में मंगलवार को पहली बार पांच वर्षीय पत्रकारिता कोर्स के पहले सत्र का आगाज कर दिया गया है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि मैनेजमेंट ने फैकल्टी की नियुक्ति अभी तक नहीं की है।

विभाग का उद्घाटन डीयू के वाइस चांसलर (वीसी) प्रो. योगेश त्यागी और विभाग के रजिस्ट्रार तरुण कुमार दास ने किया। फैकल्टी की नियुक्ति अब तक नहीं होने के जवाब में विभाग की ओएसडी और आईपी कॉलेज की लेक्चरर डॉ. मनसविनी एम. योगी ने कहा कि फिलहाल तो ओरिएंटेशन कार्यक्रम चलेगा। इसमें गेस्ट लेक्चरर्स के जरिए स्टूडेंट्स को मीडिया के बारीकियों से अवगत कराया जाएगा। यूनिवर्सिटी में दो परमानेंट लेक्चरर्स की पोस्ट भी खाली है।

बता दें कि डीयू में पहली बार पांच वर्षीय पत्रकारिता कोर्स शुरू किया गया है। मंगलवार से इस कोर्स के लिए कक्षाओं की शुरुआत हो गई। इस कोर्स में 60 स्टूडेंट्स हिंदी मीडियम के और 60 अंग्रेजी मीडियम के हैं, जिन्हें पांच वर्षीय ग्रेजुएशन कम पीजी कोर्स में दाखिला दिया गया है।

इस बारे में डीयू की संवैधानिक बॉडी एग्जिक्यूटिव काउंसिल के सदस्य डॉ. राजेश झा ने कहा कि जब विभाग गठित करने के लिए प्रस्ताव लाया गया था तो इसका विरोध किया गया था। विरोध सेल्फ फाइनेंस कोर्स को लेकर था क्योंकि डीयू के बहुत से कॉलेजों में जर्नलिज्म कोर्स ग्रेजुएशन स्तर पर पढ़ाया जा रहा है। हमने कहा था कि अन्य विभागों की तरह न्यूनतम फीस पर वहां के छात्रों को पीजी, एमफिल और पीएचडी करने की सुविधा मिले, लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन ने एक न सुनी तो बतौर सदस्य भी मैंने इसका विरोध किया। अब हाल यह है कि यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की बिल्डिंग में चल रहे क्लस्टर इनोवेशन सेंटर के साथ ही इस विभाग को भी शुरू कर दिया गया है। विभाग में अभी तक एक भी स्थायी लेक्चरर की नियुक्ति नहीं की गई है।

उल्लेखनीय है कि वर्तमान में जो छात्र पांच वर्षीय कोर्स के अंतर्गत दाखिला लेकर तीन साल की पढ़ाई पूरा कर कोर्स छोड़ना चाहेगा, उसे यूजी की डिग्री और तीन साल बाद जो कोर्स को छोड़ेंगे उसके आधार पर छात्र अन्य विश्वविद्यालय के चौथे वर्ष में दाखिला लेकर पीजी कर सकेगा। 

पहले सेमेस्टर में ज्यादा, दूसरे में कम फीस

पांच वर्षीय पत्रकारिता कोर्स को शुरू करने से पहले इसकी फीस प्रति सेमेस्टर 25 हजार रुपए की घोषणा की गई थी, लेकिन अब इसे 35 हजार कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि 25 हजार रुपए केवल कोर्स फीस है। इसमें लाइब्रेरी व अन्य शुल्क नहीं जोड़ा गया था। दूसरे सेमेस्टर में यह फीस कम होकर 28 हजार हो जाएगी।  

बता दें कि यह कोर्स 10 सेमेस्टर का है तो आगे भी ऐसी ही फीस रहेगी, इस पर अधिकारियों का कहना है कि हर साल फीस की समीक्षा की जाएगी। इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि छात्रों की जेब पर वह भारी न पड़े।

गौरतलब है कि सेल्फ फाइनेसिंग मोड में चलाए जाने के कारण इस कोर्स को शुरुआत में विरोध का सामना करना पड़ा था।

  

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