दो पुलिस कर्मियों को सजा दिलाने हाई कोर्ट पहुंची महिला पत्रकार...

दो पुलिस कर्मियों को सजा दिलाने हाई कोर्ट पहुंची महिला पत्रकार...

Monday, 18 June, 2018

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

'दिनाकरन ग्रुपकी मैगजीन Kungumam Thozhi की पत्रकार 'जे केविन मलार' (J Kavin Malar) ने सेंट्रल क्राइम ब्रांच की साइबर क्राइम सेल के पुलिस इंस्‍पेक्‍टर अन्बार्शन (Anbarasan) और पुलिस कमिश्‍नर ए.के. विश्‍वनाथन के खिलाफ कार्रवाई की गुहार को लेकर मद्रास हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अपनी याचिका में पत्रकार ने मांग की है कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन न करने पर इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ अवमानना के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।  

मद्रास हाई कोर्ट में दायर याचिका में पत्रकार का कहना है कि 10 मई को अभिनेता व बीजपी नेता एस.वी. शेखर की अग्रिम जमानत की याचिका खारिज करने के साथ ही कोर्ट ने अन्बार्शन को मामले की जांच का आदेश दिया था। लेकिन अन्बार्शन ने शेखर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

शेखर के खिलाफ यह मामला उसके दोस्‍त द्वारा फेसबुक पर की गई एक अपमानजनक पोस्‍ट से जुड़ा हुआ हैजिसमें कथित रूप से महिला पत्रकारों के खिलाफ अपमानजनक टिप्‍पणी की गई है। इस पोस्‍ट के सामने आने और शेखर द्वारा उसे शेयर करने के बाद काफी बवाल मचा हुआ है।

अपनी याचिका में महिला पत्रकार का यह भी कहना है कि आरोपित ने जब पुलिस की मौजूदगी में केंद्रीय मंत्री पोन राधाकृष्‍णन से मुलाकात की थीतो यह प्रसारण मीडिया में भी हुआ था। उन्‍होंने दावा किया कि 10 जून को शेखर ने पुलिस की सुरक्षा में फिल्‍म प्रड्यूसर्स के चुनाव में भाग लिया और वोट भी दिया। इस दौरान पुलिस ने अभियुक्‍त को गिरफ्तार करने के बजाय उसे सुरक्षा प्रदान की।

वहीं दूसरी तरफविधानसभा में बुधवार को डीएमके सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया, क्योंकि उन्हें एस.वी. शेखर से जुड़े इस मुद्दे को सदन में उठाने की अनुमति नहीं मिली। शून्यकाल में विपक्ष के नेता एम.के. स्टालिन ने शेखर द्वारा द्वारा की गई अभद्र टिप्पणी के मामले को उठाने की मांग कीलेकिन विधानसभा अध्यक्ष पी. धनपाल ने अनुमति देने से इनकार कर दिया। लगातार आग्रह के बावजूद अध्यक्ष ने अपना निर्णय नहीं बदला, तो स्टालिन सहित पार्टी के अन्य सदस्यों ने वॉकआउट कर दिया। 

सदन के बाहर संवाददाताओं से बातचीत में स्टालिन ने कहा हाइ कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा शेखर की अग्रिम जमानत की याचिका रद्द होने के बावजूद राज्य सरकार शेखर को गिरफ्तार करने में संकोच कर रही है। उन्होंने कहा शेखर को गिरफ्तार नही करने को लेकर हाई कोर्ट ने पुलिस विभाग की निंदा भी की थी। उसके बावजूद सरकार शेखर को गिरफ्तार करने से पीछे हट रही है जिससे शेखर आराम से घूम रहे हैं। 

गौतरलब है कि महिला पत्रकार के खिलाफ फेसबुक पर अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में पुलिस विभाग द्वारा विभिन्न धाराओं के तहत शेखर के खिलाफ शिकायत दर्ज कर उनकी तलाश की जा रही थी। इससे बचने के लिए शेखर ने कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका लगाई थी जिसे मद्रास हाईकोर्ट ने बीते महीने 10 मई को खारिज कर दिया था, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर एक जून तक रोक लगा दी थी, साथ ही तमिलनाडु सरकार और पुलिस के साइबर सेल को जांच के लिए नोटिस भी जारी किया था।


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